पीडीएम का मिला साथ तो अच्छे अच्छों का गणित बिगाड़ देंगे ‘शैलेंद्र’ !
भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब पूर्व सांसद शैलेंद्र पर सबकी नजर
अपना दल (क) के राष्ट्रीय सचिव ने कहा जनसत्ता दल से कोई परहेज नहीं
शुक्रवार को दिल्ली में बुलाई गई है पीडीएम गठबंधन की बैठक
सपा भी लगा सकती है शैलेंद्र पर दांव
हिमांशु भट्ट : कौशांबी
कौशांबी संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। उनके पीडीएम के पाले में जाने की चर्चाओं के बीच राजनीति के जानकर साफ कह रहे हैं कि ऐसा हुआ तो वह अच्छे अच्छों की गणित बिगाड़ देंगे। त्रिकोणीय घमासान होने से इंकार नहीं किया जा सकता। इस बीच अपना दल (कमेरावादी) ने साफ भी कर दिया है कि उसे जनसत्ता दल से कोई परहेज नहीं है। हालांकि, अटकलें यह भी हैं कि सपा भी शैलेंद्र पर दांव लगा सकती है।
शैलेंद्र कुमार वर्ष 1998, 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में लगातार तीन बार कौशांबी सांसद रहे। तीनों चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर जीता। 2014 का चुनाव भी वह सपा से ही लड़े लेकिन, मोदी लहर के आगे टिक नहीं पाए और भाजपा के विनोद सोनकर ने चारों खाने चित कर दिया। 2019 का चुनाव शैलेंद्र ने जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) से लड़ा। इस बार तीसरे स्थान पर रहना पड़ा। 2024 के चुनाव में कायास लगाया जा रहा था कि भाजपा उनके ऊपर दांव लगा सकती है। बुधवार को भाजपा ने अपना पत्ता खोला तो इन अटकलों पर विराम लग गया। इसी के साथ शैलेंद्र पर अब हर किसी की निगाह लग गई है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि इन दिनों सपा से जनसत्ता दल प्रमुख राजा भैया की घनिष्ठता नहीं है। पिछले दिनों हुए राज्य सभा चुनाव में राजा भैया ने सपा के खिलाफ वोटिंग भी की थी। ऐसे में कहा जा रहा है कि जनसत्ता दल के नेता और पूर्व सांसद शैलेंद्र पीडीएम का दामन थाम सकते हैं। पीडीएम के सूत्रधार दल यानी अपना दल (क) के राष्ट्रीय सचिव अजय पटेल ने बयान भी दिया है कि जनसत्ता से उन्हें कोई गुरेज नहीं है। पुख्ता खबर है कि शुक्रवार को दिल्ली में पीडीएम गठबंधन की बैठक होगी। संभव है कि इसमें शैलेंद्र के नाम पर मंथन किया जाए। वैसे, जनसत्ता दल के नेताओं ने अभी इस बाबत कुछ भी बोलने से इंकार किया है।

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जानिए शैलेंद्र क्यों बिगाड़ सकते हैं गणित
शैलेंद्र कुमार तीन बार कौशांबी सांसद रह चुके हैं। वह जनसत्ता दल प्रमुख राजा भैया के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसलिए, प्रतापगढ़ की बाबागंज और कुंडा विधानसभा सीट से लोकसभा चुनाव में उन्हें जिताऊ वोट मिलता है। 2019 के लोकसभा चुनाव का आंकड़ा देखें तो बाबागंज में शैलेंद्र को 53845, भाजपा के विनोद सोनकर को 50347 और सपा के इंद्रजीत को 39297 वोट मिला था। इसी तरह कुंडा सीट पर शैलेंद्र को दो गुना के करीब 82252, विनोद सोनकर को 43880 तो इंद्रजीत को 44903 मत मिला था। यह चुनाव शैलेंद्र ने जनसत्ता के टिकट पर ही लड़ा था। सियासत के जानकारों का कहना है कि अबकी पीडीएम का साथ मिला तो मुस्लिम, दलित तथा पिछड़ा वोट भी शैलेंद्र को मिल सकता है। इस तरह कौशांबी की तीनों विस सीटों पर भी उनकी स्थिति मजबूत होगी। फिर साफ है कि गणित बिगाड़ने में भी सक्षम होंगे। हालांकि, 2019 के चुनाव में शैलेंद्र कौशांबी की तीनों विस सीटों पर हारे थे। उन्हें सिराथू में 7032, मंझनपुर में 6958 और चायल में 6182 मत से ही संतोष करना पड़ा था।
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सपा के लिए अंजान नहीं हैं शैलेंद्र
पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार सपा के लिए नया चेहरा नहीं हैं। 1998, 2004 और 2009 का चुनाव वह सपा से ही जीते थे। सपा उनकी राजनीतिक पकड़ से वाकिफ है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सपा इनपर दांव लगा दे। हालांकि, इसके लिए जनसत्ता दल प्रमुख की सहमति जरूरी है। राजनीतिज्ञों का कहना है की राजनीति में सबकुछ जायज है। वैसे, अभी तक की स्थिति तो यही है कि सपा को इंद्रजीत सरोज का बेटा पुष्पेंद्र ही पसंद है।
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