कौशांबी
करारी कस्बे में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आठवीं का जूलूस निकाला गया इस जूलूस में हज़ारों की संख्या में बूढ़े जवान बच्चे महिलऐं मौजूद रही। इस मजलिस की शुरुआत तिलावत कुरान ए पाक से हुई उसके बाद हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आली जनाब मौलाना अहमद रज़ा ज़ोरारा कुम ईरान ने फज़ायलो मसायब बयान किए मसायब सुन अज़ादारों की आंखे नम हो गई। जावेद रिजवी ने तकरीर करते थे मसाएब बयान किया एक-एक के मसाएब पढ़े गए कहीं आलम बरामद हुआ तो कहीं जुलजनाह उसके पीछे नन्हे अली असगर का झूला भी निकाला गया बीबीयों की हमारी भी निकाली गई। अलम ताबूत जुलजना हमारी बरामद होते ही लोग अपने आप को रॉक न पाए आंखों से अश्क जारी हो गए। उसके बाद जनाबे सकीना के ताबूत पर जनाब मौलाना जमीर हैदर कर्रावी ने तकरीर की उन्होंने बीबी सकीना के मसाएब पढ़े जैसे ही बीबी सकीना के ताबूत की ज़ियारत के लिए पर्दे हटाए गए हाय सकीना हाय प्यास की सदा बुलंद हो गई लोग ज़ारो कतार रोने लगे और एक- एक कर बीबी सकीना की जियारत की। नौहा ख्वांन मुनौव्वर जलालपूरी ने पढ़ा सुन लो बेटी की रुदाद आए बाबा कैदखाने में दम घुटता है ए बाबा। उस नोहे के बाद शकील हैदर भोपालपूरी ने पढ़ा यह कहती थी जिंदा में रो कर सकीना चले आओ दरिया पर अम्मू दोबारा। वही नज्फी व सैफ रिजवी करारवी ने पढ़ा करती थी मैयत यह बानो बुका देखते ही देखते क्या हो गया। इस नौहे के बाद धीरे-धीरे जुलूस को आगे बढ़ाया गया और शिया जामा मस्जिद पर पहुंचा जहां मौलाना जावद हैदर जवादी ने इमाम हसन असकरी की याद में मसाएब पड़े सुनकर आज़ादर गिरिया करने लगे वही इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम का ताबूत बरामद हुआ अज़ादारों की आवाज बुलंद हो गई हाय हसन असकरी ज़हर से मारा तुम्हें हाय हसन असकरी जहर से मारा तुम्हें, की सदाएं बुलंद हो गई उसके बाद नजफी रिजवी ने नोहा पढ़ते हुए धीरे-धीरे जुलूस को आखिरी एख्तेताम तक ले गए, उसके बाद मौलाना मोहम्मद अख्तर साहब ने भी बीबियों पे हुए जुल्म को बयाना किया आजादर जारो कतार रोने लगे। जनाब हसन मोहम्मद साहब करारवी ने अल विदाई तकरीर करते हुए अलम सुलजना गहवारा हमारी को अलविदा कहा एक-एक कर अलविदा करते गए आज़ादर गिरया करते गए पूरे मजमे में हाय हुसैन हाय हुसैन की सदा बुलंद हो रही थी। कहा अगर अगले बरस रहे हम तो यह गम है वरना सलामे आखिर है जुलूस ख़त्म होने के बाद सभी लोग अपने अपने घरों को वापस चले गए।








