चक दे इंडिया से प्रेरित बेटी ने बढ़ाया हरियाणा का मान, जूनियर हॉकी टीम का बनी चेहरा, पिता करते है मजदूरी

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नितिन अंतिल/सोनीपत. जितना बड़ा सपना होगा संघर्ष ,चुनौतियां और मेहनत उतनी ही अधिम होगी . जो इन चुनौतियों से पार पाएगा उसका सपना ही साकार होगा . हरियाणा की बेटी मंजू का सपना इतना ही बड़ा था. जाहिर तौर पर उनके सामने चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी थी. लेकिन मंजू की जिद ,जुनून और मेहनत के आगे इन चुनौतियों को भी झुकना पड़ा. मंजू के सपने की शुरुआत एक फिल्म से हुई.

साल 2007 में आई बॉलीवुड फिल्म “चक दे इंडिया” देख सोनीपत के ब्रह्म नगर की रहने वाली मंजू ने एक सपना देखा था. सपना था हॉकी खिलाड़ी बनने का. फिल्म देखने के बाद मंजू ने ठान लिया था कि कैसे भी बस हॉकी खिलाड़ी बनना है. खेलने की जिद और हॉकी के प्रति जुनून और कड़ा संघर्ष करने के बाद मंजू भारतीय महिला जूनियर हॉकी टीम की मेन प्लेयर बन चुकी हैं. अब भारतीय हॉकी टीम को वर्ल्ड कप दिलाना मंजू का सपना है.

पिता ने दिया संघर्ष में सहयोग
मंजू की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनके पिता का है. मंजू के दो भाई हैं. पिता के कंधों पर तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी. मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च जैसे-तैसे निकालते हैं पर बेटी की प्रैक्टिस और अन्य खर्च के लिए पैसे नहीं बचा पाते थे. लेकिन बेटी का सपना पूरा करना था तो पिता ने हार नहीं मानी और पिता ने ओवरटाइम कर बेटी को हॉकी प्रैक्टिस के लिए भेजा और उसके सभी खर्चे पूरे किए.वहीं मंजू के कोच ने भी इस संघर्ष में उसे पूरा सहयोग दिया. मंजू को कोच अक्सर उसे आर्थिक रूप से सहायता की. मंजू के कोच बताते हैं कि जब मंजू छठी कक्षा में होती थी तब से प्रैक्टिस के लिए आया करती थी. आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे मंजू को ग्राउंड में प्रैक्टिस का सामान दिलवाते थे.

रेलवे में नौकरी कर रही है मंजू
दिन-रात मेहनत करने के बाद मंजू इस मुकाम पर पहुंच चुकी है. जिसका उसने बचपन से सपना देखा था. इसके अलावा 2 साल पहले मंजू से उत्तर रेलवे में नौकरी भी जॉइन की है. भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी मंजू ने आज जो मुकाम हासिल किया है उसके बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है.

Tags: Indian hockey player, Indian men’s hockey team, Indian Women Hockey, Local18, Sports news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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