यहां गिरे थे माता सती के वस्त्र व आभूषण, 51 शक्तिपीठों में से एक है ऋषिकेश का ये मंदिर


ईशा बिरोरिया/ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड में वैसे तो कई सारे मंदिर स्थापित हैं. जिनसे अलग-अलग मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. उन्हीं में से एक है लक्ष्मण झूला के पास स्थित योगिनी दुर्गा माता मंदिर. यह मंदिर ऋषिकेश के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिरों में से एक हैं. दुनिया भर के लोग यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं.

न्यूज 18 के साथ हुई बातचीत के दौरान साधक सुनिल कुमार बताते हैं कि- देश के विभिन्न क्षेत्रों में 51 शक्ति पीठ हैं, जिनमें से एक शक्ति पीठ है ऋषिकेश में स्थित योगिनी दुर्गा माता मंदिर. त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पास स्थापित यह मंदिर भी 13 मंजिला का मंदिर है, जहां मां पार्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति भी स्थापित हैं. अगर आप ऋषिकेश घूमने आए हैं या आने की सोच रहें हैं तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें.

योगिनी दुर्गा माता मंदिर का इतिहास
सुनिल बताते हैं कि- इस मंदिर का एक रोचक इतिहास है. इस मंदिर से जुड़ी एक कथा काफी प्रचलित हैं. भगवान शिव जब माता सती के वियोग को सह न सके तो वह क्रोधित होकर माता सती का शव लेकर शिव तांडव करने लगे. जिस कारण पूरे ब्रह्मांड पर प्रलय छाने लगा, यह देख भगवान विष्णु भगवान ने इस प्रलय को रोकने के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए. माता के शरीर के अंग और आभूषण 51 टुकड़ों में धरती पर अलग अलग जगहों पर गिरे, जो शक्तिपीठ बन गए.

यहां गिरे थे माता सती के आभूषण
ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर मां सती के वस्त्र व आभूषण गिरे थे, जिसके बाद यहां इस मंदिर का निर्माण किया गया. सभी भक्तगण यहां अपनी मनोकामना पूर्ण होने की आस लेकर मां के दरबार में आते है. जहां मां अपने सभी भक्तों की दिल से मांगी गई मुरादें को पुरा करती हैं. माता के अनेकों रूपों के साथ ही यहां आपको अन्य देवी देवताओं के दर्शन भी हो जाएंगे.

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Author: Jagran Times

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