चंबल में मथुरा के पेड़ों को टक्कर दे रहे रामबाबू के पेड़े, दाम में भी बेहद कम

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आकाश गौर/मुरैना. मथुरा के पेड़ों का स्वाद तो आपने जरूर चखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं चंबल अंचल के रामबाबू के पेड़े मथुरा के पेड़ों को टक्कर दे रहे हैं. इन पेड़ों का स्वाद ऐसा है कि चंबल के हर व्यक्ति की जुबां पर इसका रंग चढ़ गया है. लोग इनकी दुकान को इनके दादा रामबाबू पेड़े वालों की दुकान के नाम से जानते हैं. रामबाबू के पोते विपिन कुमार मित्तल बताते हैं कि दादाजी कभी 100 साल पहले जमीन पर रखकर पेड़े बेचा करते थे, लेकिन हमने उनके काम को यूं ही बनाए रखा और आगे बढ़ा दिया. जिसके बाद अब हमारी दुकान दादाजी के नाम से इस चंबल अंचल में प्रसिद्ध है.

ऐसे बनते हैं पेड़े
दुकान संचालक विपिन कुमार मित्तल बताते हैं कि सबसे पहले हम शुद्ध दूध मंगवाते हैं, जिसके बाद उसका मावा बनाते हैं. अब बारी आती है इसके स्वाद की, जिसके लिए इस मावे की पेड़ों के स्वाद अनुसार भुनाई की जाती है. मावा की भुनाई के कारण की स्वाद बैठ पाता है, जिसके बाद इसे मीठा करने के लिए स्वाद अनुसार पीसी हुई शक्कर डाली जाती है. फिर इलायची डालते हैं. कुछ मसाले भी मिलाए जाते हैं.
इसके बाद पेड़ों को बनाकर ऊपर से सजाने के लिए बीज लगा देते हैं और एक बात जो मुख्य स्वाद है मावा की भुनाई का है. अगर इनके रेट की बात करें तो यह पेड़े प्रति किलो के हिसाब से मिलते हैं और यह 450 रुपए प्रति किलो हैं.

ऐसे पहुंचे दुकान पर
यह रामबाबू पेड़े वालों की दुकान वैसे तो अंचल में प्रसिद्ध है, लेकिन आपको बता दें यह दुकान मुरैना रेलवे स्टेशन के पास कोतवाली पड़ाव में स्थित है. यह दुकान 110 साल से अधिक पुरानी है. इस दुकान को अब रामबाबू के पोते और परपोते चला रहे हैं. इनकी दुकान पर पेड़ों के अलाव करीब 20 से 25 तरह की मिठाइयां उपलब्ध रहती हैं.

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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 10:17 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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