Jagannath Rath yatra 2023: आज निकलेगी भव्य रथ यात्रा, 5 क्विंटल प्रसाद बनाने की तैयारी

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सौरभ तिवारी/बिलासपुर. 15 दिनों के बाद एक बार फिर से श्री जगन्नाथ मंदिर के पट भक्तों के लिए खोले गए और भगवान ने नव यौवन दर्शन भक्तों को दिया. 15 दिनों के उपचार के बाद प्रभु जगन्नाथ की तबियत अब ठीक हो गई है. रविवार सुबह करीब 9:30 बजे से 10:30 बजे तक मंदिर के पुजारी गोविंद पाठी ने विशेष पूजा अर्चना कर परंपरा के अनुसार, मंदिर पर नया ध्वज चढ़ाया. नेत्र उत्सव में परंपरा है की पुजारी भगवान की आंखों में काजल लगाते हैं और चंदन का तिलक किया जाता है.

इसके बाद प्रभु सार्वजनिक रूप से दर्शन के लिए तैयार होते हैं. इस अवसर पर प्रभु को देखने के लिए हेरा पंचमी से पहले नेत्र एवं नव यौवन उत्सव पर बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे.

भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ हर वर्ष भक्तों के बीच पहुंच दर्शन देते हैं. इस वर्ष भी रथ यात्रा के माध्यम से भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाएंगे. यह परंपरा बिलासपुर में भी निभाई जाती है. 20 जून को जगन्नाथ मंदिर से भगवान की रथ यात्रा निकाली जाएगी. छेरा पहरा की परंपरा का पालन कर भक्त रथ को रस्सी से खींचते हुए प्रभु को नगर भ्रमण कराएंगे.

16 फीट लंबा है भगवान का रथ

बिलासपुर में रथयात्रा के लिए 16 फीट लंबा, 17 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा रथ तैयार किया गया है. रथ को खींचने के लिए 108 फीट लंबी रस्सी भी तैयार है. रंग रोगन और साज सजावट के साथ रथ अब यात्रा के लिए तैयार है. 20 जून को रेलवे क्षेत्र स्थित श्री मंदिर से रथयात्रा निकलकर तितली चौक, रेलवे स्टेशन, तार बाहर, गांधी चौक, तोरवा थाना काली मंदिर होते हुए उड़िया स्कूल में निर्मित गुंडिचा मंदिर पहुंचेगी और फिर 28 जून को बहूडा यात्रा में इसी रास्ते से चलकर प्रभु वापस आएंगे.

महाप्रसाद की संख्या बढ़ाई गई

जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा के अवसर पर महाप्रसाद कनिका का वितरण किया जाएगा. भक्तों की बढ़ती संख्या को देखकर इसकी मात्रा 1 क्विंटल से बढ़ाकर 5 क्विंटल कर दी गयी है. कनिका का यह खास महा प्रसाद चावल, काजू, किसमिस, लौंग, इलाइची, चीनी, हल्दी आदि से तैयार किया जाता है. 20 जून सुबह से ही पूजा-अर्चना शुरू हो गई. अनेक अनुष्ठानों के बाद दोपहर 1:00 बजे यात्रा से पहले विधायक शैलेश पांडे छेरा पहरा की परंपरा का पालन करते हुए विशेष झाड़ू से झाड़ू लगाएंगे. दोपहर करीब 2:00 बजे मंदिर से रथ यात्रा आरंभ होगी. देर शाम भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ गुंडीचा मंदिर पहुंचेंगे. जहां आगामी 8 दिनों तक विविध सांस्कृतिक, धार्मिक अनुष्ठान होंगे. 28 जून को घर वापसी होगी.

भगवान जगन्नाथ रूठी हुई देवी लक्ष्मी को मनाएंगे

मंदिर पहुंचकर भगवान जगन्नाथ रूठी हुई देवी लक्ष्मी को मनाएंगे. जिसके बाद पुनः भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भक्तों को नियमित रूप से मंदिर में ही दर्शन देंगे. भगवान की इस अनोखी लीला का साक्षी बनने भक्तों में खास उत्साह है. नेत्रोत्सव से लेकर बहूडा यात्रा तक यही उत्साह हर बार देखने को मिलता है जो की इस पर्व को बेहद खास बनाता है.

Tags: Bilaspur news, Chhattisgarh news, Jagannath Rath Yatra, Local18

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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