बाबा राजपुरी डेरा…जहां दूध चढ़ाने से पूरी होती है मनोकामना! बाबा के श्राप का किस्सा भी मशहूर

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वीरेंद्र पुरी/कैथल: हरियाणा की पवित्र धरा पर कई प्राचीन मंदिर, गुरुद्वारे और डेरे हैं, जिनका सैंकड़ों, हजारों साल पुराना इतिहास है. ऐसा ही एक डेरा कैथल के गांव बाबा लदाना में है. इसे डेरा बाबा राजपुरी कहते हैं, जिसका इतिहास 550 वर्ष पुराना है. इसे दूधाधारी बाबा का डेरा भी कहते हैं. मान्यता है कि यहां दूध चढ़ाने से पशुधन में वृद्धि होती है. यह डेरा हरियाणा में पशुओं की सुख-शांति के लिए विख्यात है. बाबा राजपुरी से जुड़ी एक रोचक कहानी भी है.

डेरे के महंत बाबा दूजपुरी ने बताया कि करीब 500 वर्ष पहले बाबा राजपुरी गांव बाबा लदाना और गांव अटैला के बीच से कहीं जा रहे थे. उस समय आस-पास के कई गांव के भैंस चराने वाले पाली एक स्थान पर हजारों भैंसों को बैठा कर रखते थे. एक दिन उनके पास से बाबा राजपुरी जा रहे थे, तो वहां मौजूद भैंस चराने वालों ने कहा कि बाबा यहां से मत जाओ, हमारी भैंस बैठी हैं और ये उठ जाएंगी. बाबा राजपुरी ने कहा कि अब ये भैंसें नहीं उठेंगी और इतना कहकर वे वहां से चले गए.

इसलिए शुरू हुई पूजा
आगे बताया, कुछ देर बाद जब लोग भैंसों को उठाने लगे तो एक भी भैंस नहीं उठी, तब उन्हें अहसास हुआ कि यह बाबा का चमत्कार है. सभी पाली एकत्रित होकर बाबा के पास गए और उनसे उनका रास्ता रोकने को लेकर माफी मांगी. उसके बाद बाबा ने कहा कि जाओ एक भैंस को छोड़कर तुम्हारी सभी भैंसें उठ जाएंगी और ऐसा ही हुआ. तभी से पशुओं की सुख-शांति के लिए बाबा राजपुरी की पूजा की जाती है.

देश भर में सैंकड़ों मठ और डेरे
महंत दूजपुरी ने बताया कि यह डेरा स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस और उनके गुरु महंत तोतापुरी महाराज की तपोस्थली भी रहा है. यहां महंत तोतापुरी की समाधि भी है. बताया कि माता हिंगलाज अष्टमी की रात को डेरे में बने मंदिर में आती हैं और वर्षों पुराने जाल के पेड़ पर धागा बांधकर जाती हैं. दशहरा के दिन जाल के पेड़ पर बाबा राजपुरी और माता हिंगलाज की पूजा कर ध्वजा चढ़ाई जाती है. बाबा राजपुरी के देश भर में करीब 365 मठ और डेरे हैं.

यहां का मेला पूरे हरियाणा में मशहूर
डेरा राजपुरी पर हरियाणा के विभिन्न जिलों से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं. महंत ने बताया कि डेरे में हर वर्ष दशहरे, एकादशी और द्वादशी को विशाल मेला लगता है. लाखों की संख्या में भक्त हर साल पूजा करने आते हैं. डेरे में तीन दिनों तक लगातार मेला लगता है. मेले के अंतिम दिन राज्य स्तरीय विशाल कुश्ती दंगल करवाया जाता है, जिसमें हरियाणा के नामी पहलवान भाग लेते हैं. भक्त यहां दूध, आटा और घी चढ़ाकर जाते हैं. तीन दिनों में हजारों क्विंटल दूध एकत्रित हो जाता है, जिसका प्रसाद बनाकर भक्तों में बांटा जाता है.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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