
जितेंद्र झा/लखीसराय: बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदा के समय में सीमित संसाधनों के बीच बचाव को लेकर अक्सर सरकार जागरूकता अभियान चलाती है. शहर के लेकर ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों को आपदा से जुड़ी जानकारियां दी जाती है. वहीं आपात स्थिति के समय बचाव के लिए प्रारंभिक तौर पर किस प्रकार का कदम उठाना चाहिए इसकी जानकारी बिहटा स्थित 9 बिहार एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर कृष्णकांत पाठक ने भी साझा किया. इसी कड़ी में लखीसराय में राज्य आपदा प्रबंधन के द्वारा समाहरणालय परिसर में मॉक ड्रिल किया गया. जिसमें केके पाठक के नेतृत्व में करीब 20 एनडीआरएफ के जवानों ने बाढ़ के दौरान कैसे जान बचाई जा सकती है इसके बारे में जानकारी दी गई है. जिसमें यह बताया गया कि अचानक से अगर आपके इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है तो आप छोटे-छोटे ड्राफ्ट की मदद से भी लोगों की जान बचा सकते हैं.
एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर केके पाठक ने बताया कि दो फुटबॉल को एक दूसरे से रस्सी के सहारे बांधकर बाढ़ के समय लोगों की जान बचाई जा सकती है. वहीं 5 लीटर के तेल के डिब्बे के सहारे मजबूत रस्सी से बांधकर 60 केजी तक के वजन के लोगों की भी जान बचा सकते हैं. इसके अलावा छोटे-छोटे बांस की बल्ली को जोड़कर एक अस्थाई नाव बनाकर भी लोगों की जान बचाई जा सकती है. बाढ़ के दौरान सबसे खास ध्यान रखने वाली बात यह है कि अपने धैर्य को न खोते हुए काम को अंजाम दें. बाढ़ के समय पानी में डूबे हुए व्यक्ति को को सरल उपाय करके बचाया जा सकता है.
जानिए क्या है सीपीआर
एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर केके पाठक ने बताया कि सीपीआर यानि कार्डियोपलमोनरी रिससिटेशन एक आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया है. यह ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है, जिसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया हो. इसमें कार्डियक अरेस्ट वाले व्यक्ति में श्वास और रक्त परिसंचरण को बहाल करने के लिए छाती के संकुचन और कृत्रिम वेंटिलेशन शामिल हैं. आपातकालीन स्थिति में व्यक्ति को उनके पीठ के बल उठाकर और भोजन वस्तु या उल्टी जैसे किसी भी बाधा के लिए उसके मुंह की जांच करके उसके सिर को थोड़ा पीछे झुकाएं. छाती के 30 कंप्रेशन दे और कंप्रेशन देते समय दोनों हाथों छाती पर केंद्रित होना चाहिए और कंधे सीधे हाथों पर होनी चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : June 19, 2023, 10:51 IST






