
आकाश कुमार/बोकारो. बोकारो के सेक्टर 2 के अरुण सिंह संघर्ष की मिसाल हैं. बुरे हालात से उबर कर उन्होंने खुद को खड़ा किया है. जिंदगी के मुश्किलों का सामना बहुत ढिठाई के साथ की है. मुश्किल हालात के बावजूद हार नहीं मानी. जवान बेटे की मौत से टूट चुके अरुण सिंह आज कुल्हड़ कारखाने का संचालन कर 17 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं. बोकारो के चास प्रखंड के सियारदा स्थित मड मैजिक कारखाने पर रोजाना 25000 मिट्टी के कुल्हड़ और ग्लास का निर्माण किया जाता है. बोकारो और आसपास जिलों में इसे सप्लाई की जाती है.
न्यूज 18 से बातचीत में अरुण ने बताया कि मड मैजिक कारखाने की शुरुआत काफी संघर्षपूर्ण रही है. वे बताते हैं कि 2022 में उन्होंने अपने बड़े बेटे उत्कर्ष को एक सड़क दुर्घटना में खो दिया. इसके बाद वे आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गए थे. उन पर पारिवारिक कई जिम्मेदारियां थीं. इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर बिजनेस करने की ठानी और कुल्हड़ का कारखाना खोलने का निर्णय किया. किस्मत और मेहनत का असर रहा कि मेरा कारखाना चल निकला.
कुल्हड़ बनाने की प्रक्रिया को लेकर अरुण ने बताया कि मजबूत कुल्हड़ बनाने के लिए चीटा और पीली मिट्टी का उपयोग होता है. सबसे पहले ग्राइंडर मशीन की सहायता से मिट्टी को बारीक पीसा जाता है. फिर मिट्टी पर पानी डालकर उसे फुलाया जाता है. पगमेल मशीन की सहायता से मिट्टी को गूंथ कर क्ले प्रारूप में तैयार किया जाता है. जिगर मशीन की सहायता से 60 एमएल और 200 एमएल का खांचे तैयार किया जाता है. कुल्हड़ को सूखने के बाद उसे गीले कपड़े की सहायता से चिकना किया जाता है. फिर भट्टी में 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है. इस तरह पकने के बाद तैयार कुल्लड़ बाजार में बिकने के लिए भेजा जाता है.
अरुण ने बताया कि इस कारखाने को तैयार करने में उन्हें लगभग 25 लाख रुपए का खर्च आया है. उनका लक्ष्य बोकारो के पर्यावरण को प्लास्टिक और थर्माकोल वाले कप से मुक्ति दिलाना है.
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FIRST PUBLISHED : June 15, 2023, 07:55 IST






