
शशिकांत ओझा/पलामू. यूं तो आस्था और विश्वास पर सैकड़ों मान्यताएं है. समाज में पूजा अर्चना पर मान्यता को लेकर कई मान्यताएं है. इन्ही में से लोगों की मुराद पूरी करने वाली मंदिर भैंसाखुर काफी प्रसिद्ध है. यह प्राचीनतम मंदिर है. जहां श्रद्धालु सच्चे मन से जो भी मुराद मांगते है जरूर पूरी होती है ऐसा लोग कहते हैं. मंदिर में हर रोज सैकड़ों श्रद्धालु पूजा करने आते है. सावन के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या भी बड़ जाती है. माता भगवती के दरबार में आए श्रद्धालु कभी खाली नहीं जाते.
पलामू जिला मुख्यालय से पांकी रोड में 10 किलोमीटर दूर के जमूने पंचायत में स्थित है भैंसाखूर मंदिर. इस मंदिर का इतिहास 60 साल पुराना है. मंदिर के पुजारी रामा बाबा ने बताया की 60 साल पहले यहां जंगल था और यहां पर एक बाघ और भैंसा में लड़ाई हुई थी. जिसमें बाघ और भैंसा आपस में लड़कर मर गए. जिस वजह से इस देव स्थल का नाम भैंसाखुर पड़ा. तब से यहां एक शिवालय स्थापित है. जहां आस-पास के लोग पूजा करने आते थे. यहां एक तालाब भी है जहां लोग नहाने आज भी आते हैं. धीरे-धीरे इस स्थल का विकास हुआ और और यहां श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा.
बाघ और भैसे की लड़ाई से पढ़ा भैसाखुर नाम
यहां मां दुर्गा का मंदिर भी है. जहां लोग अपनी मन्नत को मांगने आते है. यहां शादी विवाह करने भी लोग आते है. लग्न के समय में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. यहां वर्ष 2003 इंदर सिंह नामधारी द्वारा विवाह मंडप का निर्माण कराया गया है. जहां दांपत्य जीवन के लिए लोग शादी विवाह करने भी आते है. मंदिर का परिसर 6 एकड़ में फैला हुआ है. जिसमे मां भगवती का दरबार, भगवान शिव का दरबार, हनुमान जी का दरबार, तालाब है. मंदिर की देखरेख कमीटि के लोग करते हंै. मंदिर का खुला कैंपस भी है जहां हर बुधवार और शनिवार को बाजार लगता है.
पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का श्रद्धालुओं की मांग
मंदिर में पूजा करने आए जितेंद्र मिश्रा ने न्यूज 18 को बताया कि इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन इतिहास है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी होती है. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्था की जा सकती है. इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यह स्थल काफी प्रसिद्ध हो सकता है. 60 वर्ष के इतिहास में इस मंदिर में कुछ खास बदलाव आज तक नहीं हुआ. यह मंदिर यहां के लिए अमूल्य धरोहर है. इसे सरकार को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 19:35 IST






