जंगलों में मिलने वाली यह जड़ी-बूटी चर्म रोग को जड़ से करती है खत्म! 20 रुपये में 10 पौधे


आदित्य आनंद/गोड्डा. गोड्डा के बाजारों में चिरायता की बिक्री की जाती है, जिसका उपयोग खासकर चर्म रोग को दूर करने और शरीर के रक्त को साफ करने में किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग अंग्रेजी दवा की जगह चिरायता पर विश्वास रखते हैं और इसका सेवन दवा के रूप में करते हैं.

आयुर्वेदिक चिकित्सकों की मानें तो इस पौधे में कई गुण हैं. इसके नियमित उपयोग से मोटापा दूर होता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है. साथ ही इसके उपयोग से गैस जैसी बीमारी भी समाप्त हो जाती है और लीवर से संबंधित बीमारियों में भी यह कारगर माना जाता है. इसे आम बोलचाल में चिरौता कहा जाता है.

गोड्डा के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर नवीन कुमार भारती का दावा है कि चिरायता के नियमित उपयोग से शरीर की कई बीमारियां ठीक होती हैं. पुराने जमाने में किसी भी प्रकार का चर्म रोग होने पर लोग इसी का इस्तेमाल करते थे. आज भी यह उतना ही कारगर है. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है.

20 रुपये में 10 पौधे
गोड्डा के हटिया चौक पर चिरायता बेचने वाले भोला पासवान ने बताया की वह वर्षों से इस चौक पर चिरायता बेच रहे हैं. 20 रुपये में एक मुट्ठा चिरायता देते हैं. इसमें लगभग 10 पौधे होते हैं. पहाड़ी इलाकों और जंगलों से इसे लाकर बेचते हैं. इससे रोजाना 500-600 रुपये की कमाई हो जाती है.

उपयोग करने का तरीका
चिरायता की टहनी को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर रात को एक गिलास पानी में भीगने के लिए रख दें. सुबह टहनी के टुकड़े को निकाल दें और ग्लास के पानी को छानकर खाली पेट पी लें. साल में करीब एक माह तक इसका नियमित सेवन करना चाहिए.

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Author: Jagran Times

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