OMG! 52 परत की इस मिठाई पर सिक्का गिरते ही हो जाता है आर-पार, लाजवाब है स्वाद, GI टैग भी मिल चुका


कुंदन कुमार/गया. सिलाव के खाजा से सभी लोग परिचित हैं. इसकी गिनती उन मिठाइयों में की जाती है, जिसे लोग अगर एक बार खा ले तो दोबारा खाना चाहते हैं. इसकी चर्चा केवल बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे देश और यहां तक की दुनिया में की जाती हैं.

बिहार की संस्कृति में खाजा पूरी तरह से रचा-बसा है. वैसे तो इस मिठाई को देश के कई हिस्सों में बनाया जाता है, पर सिलाव में बने खाजा ने सभी के दिलों में अपनी एक खास जगह बना रखी है. जिसकी तुलना किसी और खाजे से नहीं की जा सकती.

52 परतों में बनता है यह खाजा
नालंदा जिला के सिलाव का खाजा प्राचीन काल से चलता आ रहा है. उनके यहां खाजा 52 परतों में बनता है. खाने में बहुत ही स्वादिष्ट और कुरकुरा होता है.खाजा बनाने में मैदा, शक्कर, वनस्पति तेल या शुद्ध घी की इस्तेमाल होता है. यह नमकीन और मीठा, दोनों ही स्वाद में बनता है.

बारिश के दो महीने सावन और भादो को छोड़ दें तो यह मिठाई करीब एक महीने तक खराब नहीं होती है. खाजा अब धीरे-धीरे पूरे देश में बनने लगाहै. गया जिले के रमना रोड, स्टेशन रोड तथा टिकारी रोड में भी सालों से बड़े पैमाने पर खाजा का निर्माण होता आ रहा है.यहां के व्यवसाई सिलाव से कारीगर मंगवाते हैं. यानी कहे तो गया में भी आपको सिलाव के खाजा का स्वाद मिल जाएगा.

गया में 60-80 दुकानदार बनाते हैं यह खाजा
गया में तकरीबन 60 से 80 दुकानदार हैं, जो खाजा बनाते हैं और बेचते हैं.इनमें से कुछ ही दुकानदार ऐसे हैं जो सिलाव से कारीगर मंगवा कर प्रसिद्ध सिलाव का खाजा बनवाते हैं. यहां ब्याह-शादी में खाजा खाने का प्रचलन है. शादी में लड़कियों के विदाई के समय यह भेंट में दिया जाता है. शादी विवाह और लग्न के दिनों में इसकी खूब डिमांड होती है.

गया के रमना रोड के दुकानदार विद्या नंदन प्रसाद बताते हैं कि वैसे तो सिलाव का खाजा पूरे भारत और विश्व में प्रसिद्ध है.उसे जीआई टैग भी मिल चुका है. लेकिन गया में भी अब सिलाव के कारीगरों के द्वारा खाजा का निर्माण शुरू हो चुका है. इसकी खूब डिमांड भी है. खास करके जब शादी ब्याह का सीजन चलता है तो इसकी बिक्री बढ़ जाती है.

ऐसे तैयार होता है सिलाव का प्रसिद्ध खाजा
खाजा बनाने के लिए पहले मैदा और घी का उपयोग करते हैं. दोनों को मिक्स कर बढ़िया से गूंथ लिया जाता है. इसके बाद 15 से 20 मिनट तक उसे छोड़ दिया जाता है. जब सभी प्रकिया पूरी हो जाती है तो लेप लगाकर उसकी कटिंग कर खाजा मिठाई तैयार की जाती है. आम तौर पर खाजा बहुत सॉफ्ट होता है और यह खाने में बहुत की स्वादिष्ट होता है. बाजार में खाजा का दाम 140-280 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है. बाजार में कई दुकान ऐसी है जो अपने अनुसार खाजा के दाम लगाती है.

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Author: Jagran Times

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