क्या होता है टर्बुलेंस, जिससे सांसत में आ जाती है हवाई यात्रियों की जान, क्यों बढ़ रहे हैं लगातार

हाइलाइट्स

खराब मौसम में बिजली कड़कने और भारी बादल होने से विमान में टर्बुलेंस पैदा होता है.
US में टर्बुलेंस से एयरलाइंस को हर साल 50 करोड़ डॉलर तक का घाटा झेलना पड़ता है.
टर्बुलेंस के दौरान चोटिल होने से बचने के लिए यात्रा के दौरान सीट की पेटी हर वक्‍त बांधें.

Turbulence: अगर आप नियमित तौर पर हवाई यात्रा करते हैं तो कभी ना कभी आपने टर्बुलेंस जरूर महसूस किया होगा. मौसम खराब होने पर हवाई यात्रियों को टर्बुलेंस को लेकर सावधान कर दिया जाता है. इससे यात्री कुर्सी की पेटी बांध लेते हैं. वहीं, साफ हवा के टर्बुलेंस को पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. अचानक होने वाले टर्बुलेंस के कारण कई बार यात्रियों को चोटें भी लग जाती हैं. यही नहीं, टर्बुलेंस के कारण एयरलाइंस कंपनियों को भी हर साल काफी नुकसान होता है. अमेरिका में टर्बुलेंस के कारण विमानों को होने वाले नुकसान से कंपनियों को 50 करोड़ डॉलर तक का घाटा झेलना पड़ता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, धरती का तापमान बढ़ने के साथ ही विमानों में टर्बुलेंस की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित शोधपत्र में ब्रिटेन की रीडिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया है कि साफ हवा में होने वाले टर्बुलेंस के मामले बीते दशकों में ज्‍यादा बढ़े हैं. शोध में पाया गया है कि एक नॉर्थ अटलांटिक विमान मार्ग पर 1979 से 2020 के बीच के 41 साल में टर्बुलेंस के मामलों में 55 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, कार्बन उत्सर्जन के कारण ऊंचाई पर हवा गर्म हो गई है, जिससे उसकी रफ्तार बदल गई है. इसी टीम ने दो साल पहले एक अध्ययन में कहा था कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में क्लीन एयर टर्बुलेंस के मामलों में 149 फीसदी तक वृद्धि होगी.

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क्‍या और कितने तरह के होते हैं टर्बुलेंस
सबसे पहले समझते हैं कि टर्बुलेंस क्या होता है? दरअसल, जब उड़ान के दौरान विमान के पंखों से हवा अनियंत्रित होकर टकराती है तो प्‍लेन में एयर टर्बुलेंस पैदा होता है. इस टर्बुलेंस के कारण विमान ऊपर नीचे होने लगता है और यात्रियों को झटके लगने शुरू हो जाते हैं. उड़ते हुए विमानों को कम के कम सात तरह के टर्बुलेंस का सामना करना पड़ता है. ज्‍यादातर बार टर्बुलेंस मौसम से जुड़ा होता है. खराब मौसम में बिजली कड़कने और भारी बादल होने से भी विमान में टर्बुलेंस पैदा होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्‍न टर्बुलेंस में क्लियर एयर टर्बुलेंस, थर्मल टर्बुलेंस, टेम्पेरेचर इंवर्जन टर्बुलेंस, मेकनिकल टर्बुलेंस, फ्रंटल टर्बुलेंस, माउंटेन वेब टर्बुलेंस और थंडरस्टॉर्म टर्बुलेंस शामिल हैं.

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जब उड़ान के दौरान विमान के पंखों से हवा अनियंत्रित होकर टकराती है तो प्‍लेन में एयर टर्बुलेंस पैदा होता है.

‘तकनीक में निवेश करें एयरलाइंस’
रीडिंग यूनिवर्सिटी में क्‍लाइमेट साइंटिस्‍ट और को-रिसर्चर प्रोफेसर पॉल विलियम्स के मुताबिक, एक दशक के अध्ययन के बाद पता चला कि जलवायु परिवर्तन से साफ हवा में टर्बुलेंस के मामले भविष्य में बढ़ते जाएंगे. अब हमारे पास इसके पुख्‍ता सबूत हैं कि ऐसा होना शुरू हो भी चुका है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर विलियम्स की सलाह है कि एयरलाइंस कंपनियों को टर्बुलेंस का पूर्वानुमान लगाने वाली तकनीकों में ज्यादा निवेश करना चाहिए. इससे आने वाले दशकों में हवाई यात्राएं मुश्किल होने के बजाय आसान हो जाएंगी. वैज्ञानिकों ने पाया कि अमेरिका और नॉर्थ अटलांटिक के विमान मार्गों में टर्बुलेंस सबसे ज्‍यादा बढ़े हैं. यूरोप, मध्य पूर्व और साउथ अटलांटिक में भी टर्बुलेंस की घटनाओं में वृद्धि हुई है.

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क्‍यों बढ़ रहीं टर्बुलेंस की घटनाएं
प्रोफेसर विलियम्स का कहना है कि हवाई यात्रा के दौरान टर्बुलेंस में बढ़ोतरी की वजह जेट स्ट्रीम में हवा की रफ्तार में ज्यादा अंतर है. जेट स्ट्रीम पृथ्वी की सतह से 8 से 10 किमी की ऊंचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली हवा की धाराएं होती हैं. ये धाराएं भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच तापमान के अंतर के कारण बनती हैं. वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट्स से मिले आंकड़ों के आधार पर ये अध्ययन किया है. बता दें कि सैटेलाइट टर्बुलेंस नहीं देख सकते, लेकिन जेट स्ट्रीम का आकार और ढांचा देख सकते हैं, जिसका विश्लेषण किया जा सकता है. विमानों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले राडार तूफान के कारण होने वाली टर्बुलेंस को तो पकड़ सकते हैं, लेकिन साफ हवा में होने वाली टर्बुलेंस को पकड़ना मुश्किल होता है.

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हवाई यात्री क्‍या बरतें सावधानी
प्रोफेसर विलियम्स कहते हैं कि उनके अध्‍ययन के नतीजों को देखकर डरने की जरूरत नहीं है. इन नतीजों को देखकर हवाई यात्रा करना ही बंद कर देना समझदारी नहीं है. बस थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है. वह कहते हैं कि अचानक होने वाले टर्बुलेंस के दौरान चोटिल होने से बचने के लिए अपनी सीटों की पेटी को पूरी यात्रा के दौरान बांधे रहना अच्‍छा विकल्‍प रहता है. उनका कहना है कि हवाई जहाज के पायलट भी हर समय अपनी कुर्सी की पेटी बांधे रखते हैं. इससे आप टर्बुलेंस के दौरान पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे.

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टर्बुलेंस के दौरान चोटिल होने से बचने के लिए अपनी सीटों की पेटी को पूरी यात्रा के दौरान बांधे रहना अच्‍छा विकल्‍प रहता है.

क्‍या कर रही हैं एयरलाइंस?
एयरलाइंस कंपनियां साफ हवा में होने वाले टर्बुलेंस का पहले से ही अनुमान लगाने की तकनीक पर काम कर रही हैं. मौसम विज्ञान पर काम करने वाली कंपनियां इसके लिए तकनीक विकसित करने पर शोध कर रही हैं. वैसे इस समय भी क्‍लीन एयर टर्बुलेंस का पहले से पता लगाने वाले कुछ सिस्टम उपलब्ध हैं. हवाइयन एयरलाइंस ने एडी डिसिपेशन रेट आधारित सिस्टम इस्तेमाल किया है. ये हर तरह की ऊंचाई पर साफ विजिबिलिटी उपलब्ध कराता है. इस तरह पायलट को गड़बड़ी का पहले ही पता चल जाता है और वे पहले ही यात्रियों को सुरक्षित रखने के उपाय कर लेते हैं.

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Author: Jagran Times

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