राहुल दवे/इंदौर. इंदौर शहर से बाहर जाना हो और घर में बुजुर्ग हैं, उन्हें साथ भी नहीं ले जा सकते और घर पर भी अकेले नहीं छोड़ सकते तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब आपकी इस समस्या का हल कनाड़िया रोड स्थित वैभव नगर में मौजूद है. दरअसल, इंदौर की प्रतिमा बुजुर्गों की देखभाल के लिए हमेशा तैयार रहती हैं. प्रतिमा कई समय से यह सेवा कार्य कर रही हैं. जिसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है.
प्रतिमा ने शादी के बाद कुछ ऐसी ही समस्या अपने आसपास देखी, जिसमें परिवार को बाहर जाना होता और घर में बुजुर्ग हैं, ऐसे में बच्चों ने या तो बुजुर्गों को घर में अकेला ही छोड़ दिया या उन्हें कहीं और भिजवा दिया. ऐसे में उनके साथ जो कुछ हुआ, उसे प्रतिमा ने नजदीक से जाना और समझा. उस समय तो वह कुछ नहीं कर पाई, लेकिन मन में ठान लिया कि एक दिन वो भी आएंगी.
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बेटा-बहू रहने लगे बाहर तो बुजुर्गों को रखने लगी साथ
साल 2004 में प्रतिमा के पति का निधन हो गया. इसके बाद बड़े संघर्षों से निजी कंपनी में खुद नौकरी कर बच्चों का पालन-पोषण किया. वर्तमान में बेटा और बहू नौकरी के चलते बाहर रहते हैं. प्रतिमा का कहना है कि मैं घर में अकेली रहती हूं. ऐसे में ख्याल आया कि अब वो दिन आ गया जब वह बुजुर्गों के लिए कुछ कर सकती हैं. क्यूं न ऐसे बुजुर्गों को घर में सहारा दें जिनकी फैमली को बाहर जाना हो और वह घर में अकेले हो. ऐसे में उनके परिवार वाले जब तक नहीं लौटते तब तक उनकी सेवा को ही लक्ष्य बनाया. पहले बेटे ने कहा कि मम्मी तुम्हें यह करने की क्या आवश्यकता है ?परिवार में कुछ और लोगों ने भी इस पर आपत्ति ली, लेकिन वह नहीं मानी.
बुजुर्गों के साथ खेलती हैं सांप सीढ़ी जैसे खेल
नतीजा यह रहा कि कुछ दिन के लिए बाहर जाने वाले परिवार अपने बुजुर्गों को यहां छोड़ने लगे और शहर लौटने पर उन्हें घर ले जाते, तब तक प्रतिभा ही उनकी सेवा करती है. समय पर स्नान, भोजन, प्रार्थना, पूजा के साथ समय समय पर मनोरंजन में पत्ते, सांप सीढ़ी सहित अन्य गेम भी उनके साथ खेलती हैं. खास बात यह है कि बुजुर्गों को भी यहां रहना पसंद आ रहा है. एक समय में 5 बुजुर्ग यहां रह सकते हैं. फिलहाल, 3 बुजुर्ग करीब एक माह से साथ ही है.
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FIRST PUBLISHED : June 14, 2023, 16:10 IST






