मिलिए बक्सर के रक्तवीर से, अब तक 62 बार कर चुके हैं रक्तदान, बिहार सरकार करेगी सम्मानित 

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गुलशन सिंह, बक्सर. कहा जाता है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है. एक व्यक्ति अपने शरीर का रक्त दान कर कई लोगों की जान बचा सकता है. लेकिन, रक्तदान करने को लेकर आज भी समाज में कई भ्रम फैला हुआ है. इससे युवा रक्तदान करने से डरते हैं. हालांकि, बक्सर के एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो अब तक 62 बार रक्तदान कर कई मरीजों की जान सीरियस कंडीशन में बचा कर मिसाल पेश कर चुके हैं. यह व्यक्ति शहर के मित्रलोक कॉलोनी निवासी 40 साल के बजरंगी भाई उर्फ बजरंगी मिश्रा हैं, जो रक्तदान करने में न जाति देखते हैं और न ही धर्म.

इतना ही नहीं रक्तदान के बाद जो डोनर कार्ड मिलता है, वह भी ब्लड बैंक में ही छोड़ देते हैं. जिससे किसी जरूरतमंद के पास रिप्लेसमेंट के लिए कोई नहीं हो तो उन्हें उनके कार्ड पर रक्त मुहैया कराया जा सके. बजरंगी भाई के पास मरीजों की जान बचाने का ऐसा जज्बा है कि रक्तदान के लिए एक बुलावे पर ट्रेन पकड़ बक्सर से पटना, बनारस और दिल्ली भी पहुंच जाते हैं.

बनारस में रक्तदान कर अनजान महिला की बचाई थी जान
बजरंगी मिश्रा ने बताया कि पहली बार रक्तदान करने की प्रेरणा 2001 में उस वक्त मिली जब अपनी बीमार मौसी को देखने वाराणसी बीएचयू अस्पताल में गए थे, जहां बगल के बेड पर एक महिला की जान बचाने के लिए ए-पॉजीटिव रक्त की आवश्यकता थी. महिला के पुत्र और रिश्तेदारों ने अपनी समस्याएं बताकर रक्तदान से मना कर दिया. उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने कहा कि यदि रक्त की व्यवस्था हो सकती है तो महिला की जान बच जाएगी.

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इस पर रहा नहीं गया और फिर रक्तदान के लिए तैयार हो गए. संयोग से उनका भी रक्त समूह ए-पॉजीटिव था और उन्होंने रक्तदान कर महिला की जान बचाई. होश आने पर महिला ने डबडबाई आंखों से बेटा कहकर संबोधित किया तो उन्हें रक्तदान की अहमियत का अहसास हुआ. उसी समय यथा संभव रक्तदान करने का संकल्प ले लिया.

दिल्ली जाकर कर चुके हैं रक्तदान
बजरंगी बताते हैं कि हर तीन महीने के बाद रक्तदान करते हैं, लेकिन आज तक जरा सी भी कमजोरी का अहसास नहीं हुआ, बल्कि रक्तदान करने के बाद उन्हें और ताजगी महसूस होता है. 90 से 95 दिनों के अंतराल पर रक्तदान का क्रम न टूटे, इसके लिए जहां भी रहते हैं, वहां नजदीकी ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान कर देते हैं. उन्होंने बताया कि आज से लगभग 4 साल पहले एम्स दिल्ली में भर्ती एक दोस्त के पिता को रक्त की जरूरत थी. सूचना मिलते ही शाम को बक्सर से ट्रेन पकड़ अगले दिन दिल्ली हाजिर हो गए और वहां अपोलो अस्पताल में रक्तदान कर दोस्त के पिता की जान बचाई.

राज्य स्तर पर तीसरी बार होंगे सम्मानित
बजरंगी बताते हैं कि रक्तदान करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाते है. रक्तदान के फायदे से युवाओं को अवगत कराते हैं. उन्होंने बताया कि ईश्वर ने चाहा तो अपने जीवन में सौ से ज्यादा बार रक्तदान करना चाहेंगे. यही नहीं, अत्यधिक रक्तदान करने को लेकर जिला स्तर पर अनेकों बार सम्मानित होने का मौका भी मिला है. जबकि राज्य स्तर पर बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दो बार रक्तवीर अवार्ड से सम्मानित किया गया है.

उन्होंने बताया कि तीसरी बार विश्व रक्तदान दिवस पर राजधानी पटना में स्वास्थ्य विभाग अवार्ड देकर सम्मानित करने के लिए बुलाया है.

Tags: Bihar News, Buxar news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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