
नरेश पारीक / चूरू. अमूमन हर गांव और शहर के चौक और चौराहे से जुड़े कुछ सुने तो कुछ अनसुने किस्से होते हैं. जिनकी चर्चाएं गांव की ग्वाड़ से लेकर शहर में चाय की टपरी पर सुनते और सुनाते हुए लोग मिल जाएंगे. वहीं अक्सर बहुत से शहरों के और वहां के चौक, चौराहे के अजीबो, गरीब नाम भी सुने होंगे. ऐसा ही एक किस्सा जुड़ा है चूरू के जलेबी चौराहे से जिसके नामकरण के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है.
शहर के मुख्य मार्ग से होकर गुजरने वाले इस चौराहे का नाम जलेबी चौराहा इसलिए नही पड़ा कि यहां कोई मिठाई की दुकान या कोई जलेबियाँ बनती हो, बल्कि इसलिए पड़ा कि यहां चौराहे पर स्थित एक हवेली में एक सेठ रहा करते थे. उनके साथ हुई ऐसी अजीबो, गरीब मजाक के बाद इस चौराहे का नाम हमेशा के लिए जलेबी चौराहा पड़ गया और आज आम बोला चाल में इस चौराहे को जलेबी चौराहे के नाम से जाना और पहचाना जाता है.
जलेबी नाम पड़ने के पीछे एक दिलचस्प कहानी
शहर के ही असगर अली और राजकुमार शर्मा बताते हैं कि सालों पहले एक कार्यक्रम में पहुुंचे एक सेठ जी के साथ किसी ने मजाक-मजाक में जलेबी सेठ के सर पर बांधे साफे में डाल दी और शोर मचा दिया कि जलेबी चोर, जलेबी चोर. जिसके बाद सेठ जी की इस हवेली और इस चौराहे को जलेबी चौराहे के नाम से बोला जाने लगा. हालांकि, ये मजाक और नाम सेठ और उसके परिवार को अच्छा नहीं लगा. लेकिन, धीरे-धीरे शहर के लोग उस परिवार को ही जलेबी चोर कहने लगे और उनकी हवेली को जलेबी चोरों की हवेली. इसके बाद घर के बाहर बने चौराहे का नाम जलेबी चोर चौराहा हो गया.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 17:46 IST






