PHOTOS: आजाद भारत का पहला अरबपति, 100 करोड़ का पेपर-वेट करता था इस्तेमाल, देश को दिया पहला एयरपोर्ट

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

जब हम देश के अरबपतियों के बारे में बात करते हैं तो दिमाग में पहला ख्याल टाटा, बिड़ला, अंबानी और अडाणी का ही आता है. लेकिन क्या आपको पता है देश का पहला अरबपति कौन था? आजादी से पहले 1940 के आसपास उसकी संपत्ति लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जो आज के समय तकरीबन 35.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. जी सही पढ़ा आपने. ये थे हैदराबाद के आखिरी निज़ाम मीर उस्मान अली खान. इन्होंने ही देश को पहला एयरपोर्ट हैदराबाद में दिलाया. इन्होंने हैदराबाद पर तक़रीबन 35 सालों तक राज किया, आजादी के बाद इनके साम्राज्य को भारतीय गणराज्य में मिला लिया गया.

01

मीर उस्मान अली खान भारत के पहले अरबपति माने जाते हैं. अप्रैल 1886 में जन्मे मीर उस्मान अपने पिता की मृत्यु के बाद 1911 में हैदराबाद की गद्दी पर बैठे. ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान हैदराबाद देश का सबसे बड़ा प्रिंसली स्टेट हुआ करता था. (Twitter)

02

मीर उस्मान अली खान साल 1911 से लेकर 1948 तक तक हैदराबाद प्रिंसली स्टेट पर राज किया. उनके शासन काल के दौरान उनकी कुल संपत्ति तक़रीबन 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब थी. आज के समय उनकी तत्कालीन संपत्ति की वैल्यू पता करें तो विश्व के सबसे अमिर व्यक्ति टेस्ला के मालिक एलॉन मस्क के बराबर थी. लेकिन आजादी के बाद साम्राज्य को भारतीय गणराज्य में मिलाने के बाद से उनका रेवेन्यू कम होने लगा था. (Wikipedia)

03

मीर उस्मान मॉडर्न हैदराबाद के जनक माने जाते थे. वह साम्राज्य के विकास के लिए काफी समर्पित थे. उन्होंने देश का पहला एयरपोर्ट हैदराबाद में बनवाया, सड़कों का निर्माण करवाया. उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों के निर्माण में आर्थिक सहयोग दिया. निज़ाम ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए 1 मिलियन रुपये का दान दिया. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए 500,000 रुपये और भारतीय विज्ञान संस्थान के लिए 300,000 रुपये का दान किया. (Wikipedia)

04

निजाम न केवल एयरपोर्ट बनवाया बल्कि उन्होंने हैदराबाद में सड़कें, रेलवे और कई भवन जैसे हैदराबाद हाई कोर्ट और बैंक ऑफ़ हैदराबाद भी बनवाया. निजाम का सभी धर्मों के प्रति काफी लगाव था. उदाहरण के तौर पर उन्होंने एलोरा के गुफाओं को संरक्षित करने का आदेश दिया था उसके लिए उन्होंने म्यूजियम भी बनवाया. उन्होंने कई हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए दान दिए जिसमें तिरुपति का बालाजी मंदिर भी शामिल है. उन्होंने 1932 में 11 साल के लिए महाभारत के प्रकाशन के लिए 1000 रूपये प्रति वर्ष दिए. (Wikipedia)

05

ऐसा कहा जाता है कि निजाम के पास 185 कैरट का हीरा था, जिसका वह पेपर-वेट के रूप में किया करते थे. इसे जैकब हीरा के नाम से भी जाना जाता है. अभी यह भारत सरकार के पास संरक्षित है. वहीं, यह भी कहा जाता है है कि निजाम ने एलिज़ाबेथ-ll के शादी में उनको हीरे का हार (Necklace) उपहार के तौर पर दिया था. इस हार को महारानी आखिरी सांस तक पहने रखा था. (Wikipedia)

06

ऐसा माना जाता है कि देश की आजादी के बाद वह पाकिस्तान के साथ जाना चाहते थे या फिर हैदराबाद में स्वतंत्र राज्य करना चाहते थे. हालांकि ऐसा नहीं हुआ और देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने ‘ऑपरेशन पोलो’ के तहत हैदराबाद को देश में मिला लिया था. 24 फरवरी 1967 को 80 साल के उम्र में आखिरी निज़ाम ने आखिरी सांस ली. (Wikipedia)

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें