इस आंखों के रंग वाले हैं दुनिया में सबसे कम, इसीलिए इन्हें कहा जाता है खास

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अगर आप ये समझते हैं कि बच्चे की आंखों का रंग वैसा ही होगा, जैसा माता-पिता का होगा तो ये गलत साबित हो सकता है. माता-पिता की आंखों के रंग के आधार पर बच्चे की आंखों के रंग का अनुमान नहीं लगा सकते. हमारी आंख के बीच में पुतली लगभग हमेशा काले रंग की होती है, इसके चारों ओर रंगीन वलय, जिसे परितारिका कहा जाता है, कितने भी रंगों की हो सकती है. (courtesy unsplash ian-dooley)

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Author: Jagran Times

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