
शानू कुमार/बरेली .बरेली में रामगंगा बैराज परियोजना आज भी अधर में लटका है. यह परियोजना दो जिले को जोड़कर बनने वाली रामगंगा बैराज परियोजना 12 साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है.करीब 332 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना की लागत बढ़कर करीब 2100 करोड़ रुपये जा पहुंची है. उत्तर प्रदेश में तीन सरकारों का कार्यकाल पूरा हो गया. लेकिन अभी तक परियोजना पूरी नही हो सकी है और आगे के कई वर्षों तक यह योजना पूरी होती हुई नजर नहीं आ रही है.
बदायूं और बरेली के बाढ़ खंड विभाग और सिंचाई निर्माण खंड विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस योजना की शुरुआत 2011 में कई गई थी, जोकि अभी तक बंद पड़ी है. बसपा सरकार के समय में इस योजना की शुरुआत हुई थी और बसपा सरकार के समय इस परियोजना की लागत कीमत करीब 332 करोड़ रुपये थी और रामगंगा बैराज को पर्यटन स्थल बनाने के दावे भी किये गए थे.
2019 में हुई पुनरीक्षित बजट की मांग
सन 2012 में सरकार के परिवर्तन होने से सरकारों की खींचतान में बैराज का काम रुक गया था.वहीं कुछ समय तक इसका काम बिल्कुल ही बन्द हो गया था फिर कुछ समय बाद इस योजना की लागत कीमत बढ़ाकर लगभग 630 करोड़ रुपये तय की गई थी.जिसके बाद फिर सरकार में परिवर्तन हुआ और भाजपा की सरकार बन गयी और भाजपा सरकार में इसको पूरा कराने की कोशिशे तेज हो गईं.जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी थी. उनकी लागत भी बढ़कर कई गुना ज्यादा हो गयी.इस वजह से बैराज को पूरा करने के लिये साल 2019 में फिर पुनरीक्षित बजट की मांग की गई. जिसके बाद बजट बढ़कर करीब 21 सौ करोड़ जा पहुंचा. लेकिन अब तक इसका काम पूरा न हो सका.
परियोजना की नहीं ले रहा कोई सुध
योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रहे (मौजूदा भी) धर्मपाल सिंह और सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने मुद्दा उठाया था. लेकिन उसका असर भी ज़्यादा देखने को नहीं मिला था. उस समय काम पूरा नहीं होने पर सांसद ने अधिकारियों की लापरवाही बताई थी.फिलहाल यह परियोजना अभी तक अधर में लटकी है. इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, जबकि बरेली में मौजूदा भाजपा सरकार के 1 कैबिनेट मंत्री 1 राज्यमंत्री और 2 सांसद भी हैं. फिर भी इसकी सुध लेने वाला कोई नही है.अब देखना होगा यह परियोजना कब पूरी हो सकेगी और कब तक यह पर्यटन स्थल बन पायेगा.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 22:08 IST






