मीरा रोड मर्डर: सरस्वती के कई टुकड़े कर भी क्या बच निकलेगा दरिंदा? उबली बॉडी से नहीं मिल रही मौत की वजह

हाइलाइट्स

शरीर में जहर का पता लगाना हुआ मुश्किल, जेजे अस्पताल ने किया शव का परीक्षण
साबित नहीं कर सकी पुलिस तो आरोपी को 2 से 5 साल की ही होगी सजा
बहनों का डीएनए टेस्ट, अस्पताल ने सरस्वती के अंग परिवार को सौंपे, अंतिम संस्कार

मुंबई. मीरा रोड निवासी सरस्वती वैद्य के शरीर के आंशिक रूप से उबले या भुने हुए हिस्सों ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए यह पता लगाना मुश्किल बना दिया है कि उनकी हत्या की गई थी या आत्महत्या से उनकी मौत हुई थी. अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर जांच एजेंसी हत्या साबित करने में विफल रहती हैं, तो आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना, या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देना) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. इसकी सजा तो 2 से 5 साल ही है.

लिव-इन पार्टनर की हत्या करने वाले 56 वर्षीय मनोज साने पर संदेह है कि उन्होंने 4 जून को गीता आकाशदीप बिल्डिंग में अपने किराए के अपार्टमेंट में सरस्वती की हत्या की. इस मामले में पुलिस जांच में कई खुलासे हो रहे हैं. पुलिस जांच में पाया गया कि हत्या करने के बाद बाद उसने पकाने से पहले शव को कई टुकड़ों में काट दिया और उनमें से कुछ को अपनी रसोई में भून दिया ताकि बिना किसी बदबू के शव को आसानी से ठिकाने लगाया जा सके. हालांकि, साने ने दावा किया है कि वैद्य ने आत्महत्या की थी और उन्होंने ‘हत्या के लिए फंसाए जाने’ से बचने के लिए शव को काटने और उसे फेंकने का फैसला किया था.

शरीर में जहर का पता लगाना हुआ मुश्किल
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले का पता लगाने से ज्यादा यह पता लगाना भी मुश्किल है कि वैद्य ने अपनी मर्जी से जहर लिया या ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात की बहुत कम संभावना है कि कलीना स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला कुछ मोटे ऊतकों या हड्डियों में जहर का पता लगाने में सक्षम होगी, जिसे जेजे अस्पताल के फोरेंसिक डॉक्टरों ने सोमवार को शव परीक्षण के दौरान इकट्ठा किया था.

साबित नहीं कर सकी पुलिस तो आरोपी को 2 से 5 साल की ही होगी सजा
अखबार के मुताबिक पुलिस के लिए चिंता की बात यह है कि वैद्य के लिव-इन पार्टनर को सबूत नष्ट करने के लिए केवल दो से पांच साल की जेल हो सकती है. उन्होंने पूर्व आईपीएस अधिकारी से वकील बने वाई पी सिंह के हवाले से कहा, “अगर जांच एजेंसी हत्या साबित करने में विफल रहती है, तो आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 (अपराध के सबूतों को गायब करना, या अपराधी को बचाने के लिए झूठी जानकारी देना) और 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.

बहनों के डीएनए टेस्ट भी किए गए
साने को सोमवार को मीरा रोड स्थित उनके किराए के फ्लैट नंबर 704 में ले जाया गया, जहां उन्होंने वैद्य की कथित तौर पर हत्या कर दी थी. इस बीच सरकारी जेजे अस्पताल ने उसके शव के अंग उसके परिवार के सदस्यों को सौंप दिए. इसके तुरंत बाद, बहनों ने री रोड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया. मृतका और उसकी तीन बड़ी बहनों के डीएनए नमूने भी कलीना की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं.

अगले विकल्प क्या हैं?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में फॉरेंसिक फिजियोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति पुराणिक के हवाले से कहा गया है, ‘आपराधिक जांच में मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आरोपी के व्यवहार संबंधी विशेषताओं का मूल्यांकन करता है. मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग, पॉलीग्राफ, मस्तिष्क विद्युत दोलन हस्ताक्षर प्रोफाइलिंग और नार्कोएनालिसिस जैसी विभिन्न तकनीकें हैं, जो मदद कर सकती हैं. पुराणिक ने आरुषि हत्याकांड, तेलगी, मालेगांव विस्फोट जैसे चर्चित मामलों की जांच की है.

Tags: Girlfriend Murder, Maharashtra News, Mumbai murder, Mumbai police

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Author: Jagran Times

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