
अंकित कुमार सिंह/सीवान: बिहार के सीवान में लंबे अर्से के बाद एक घर में बिज्जू (मुर्दाखोर) जानवर को देखा गया. जिन लोगों ने बिज्जू यानि मुर्दाखोर नाम से प्रचलित जानवर को देखा उन्हें अपनी आखों पर विश्वास भी नहीं हो रहा था. दरअसल, बिज्जू जानवर जिले के हसनपुरा प्रखंड के सेमरी गांव में निकला था. जो घर में छिपकर डेरा डाले हुआ था. घरवाले इसे रात में निकलते कई बार देखे थे. हालांकि डर से उसको छेड़ते नही थे.
रेस्क्यू करने के बाद भी हो गया फरार
हसनपुरा प्रखंड के सेमरी गांव के स्थानीय लोगों ने बिज्जू यानि मुर्दाखोर को पकड़वाने के लिए प्राइवेट रेस्क्यू टीम को बुलाया, टीम मुर्दाखोर जानवर को पकड़ने के लिए गांव पहुंची. जहां वे घर के एक कोने में रखे सामानों के पीछे छुपा हुआ था.
रेस्क्यू करने के दौरान भी रेस्क्यू टीम को काफी कड़ी मशक्कत के बाद सफलता हाथ लगी और वह पकड़ा गया. लेकिन पकड़ने के दौरान ही कई बार काटने व भागने का प्रयास किया और अंत में वह भागने में सफल भी रहा.
15 साल पूर्व तक इसकी संख्या थी अधिक
इतिहासकार व लेखक कृष्ण कुमार सिंह बताते हैं कि मुर्दाखोर जानवर की जब भी बात आती है. लोगों के जेहन में भी कई तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं. अधिकांश लोग दफन किए गए शव को खाने वाले जानवर के रूप में मुर्दाखोर को पहचानते हैं.
सीवान में आज से 15 से 20 साल के पूर्व बहुत मुर्दाखोर दिखते थे. हालांकि आज वे नजर नहीं आते हैं और अब विलुप्ति के कगार पर आ गए हैं. पहले रात हो या दिन आसानी से दिख जाते थे. अधिकांश शाम होने के बाद ये नजर आते थे. ये जानवर कब्रिस्तान, श्मशान घाट, बड़े व विशाल जंगल और नदियों के आस-पास रहते थे.
बिज्जू का कम हो गया है तादाद
रेस्क्यू टीम के कर्मी शत्रुघ्न कुमार ने बताया कि आम बोल चाल में अपने यहां इस जानवर को मुर्दाखोर कहा जाता है. हालांकि इसको बिज्जू या अंग्रेजी में Honey badger के नाम से जाना जाता है. यह जानवर एक स्तनधारी जानवर है जो भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पश्चिमी एशिया और अफ़्रीका में सर्वाधिक मिलते हैं.
भारत में भी पहले ज्यादा था, हालांकि आज उनकी तदाद कम हो गयी है. यह एक मांसाहारी प्राणी है जो अपने लड़ाकू स्वभाव और मोटी चमड़ी के कारण अन्य जानवर इससे दूर ही रहते हैं. खास बात यह है कि खूंखार प्राणी भी इसपर हमला कम हीं करते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 20:36 IST






