
आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण. मैन-एनिमल कनफ्लिक्ट हो या एनिमल टू एनिमल’ कनफ्लिक्ट, अब वीटीआर में इनपर पूरी तरह से निगरानी रखी जा सकेगी. वीटीआर प्रशासन को अब हिंसक पशुओं के रिहायशी इलाके में पहुंचने तथा भटके हुए बाघ एवं अन्य पशुओं के लोकेशन की जानकारी पलक झपकते ही लग जाएगी. अब बिना किसी देरी के यह पता चल सकेगा कि जंगली जानवर अथवा पशु वीटीआर के किस जंगल क्षेत्र में मौजूद हैं. इसके लिए ‘थर्मल इमेजिंग सिस्टम’ और ‘विट क्लॉथ’ प्रणाली का वीटीआर प्रशासन द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
किया जा रहा थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल
वीटीआर डिवीजन-वन के डीएफओ प्रद्युम्न गौरव ने बताया कि वीटीआर प्रशासन द्वारा आधुनिकतम ‘थर्मल इमेजिंग’ सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. खास बात यह है कि हाल के कुछ मामलों में बाघ के लिए सही लोकेशन का पता लगाने के लिए इसका इतेमल किया गया है. इससे ‘एनिमल टू एनिमल’ कॉनफ्लिक्ट्स अथवा ‘मैन टू एनिमल’ कॉनफ्लिक्ट्स के समय बाघ के आक्रमण को रोकने के लिए उसके लोकेशन का बड़ी आसानी से थर्मल इमेजिंग सिस्टम के द्वारा पता लगाया जा सकता है.
बता दें कि इसको संचालित करने के लिए ‘मैविक थ्रीटी ड्रोन’ का इस्तेमाल किया जाता है. इसके सहारे घने जंगलों में भी बाघ सहित अन्य पशुओं के विचरण करने का एग्जैक्ट लोकेशन प्राप्त हो जाता है. साथ ही बड़ी सहजता से भटके हुए पशुओं का रेस्क्यू करने के लिए वीटीआर के वनकर्मी अविलंब उस लोकेशन पर पहुंच सकते हैं.
अहमदाबाद से मंगाया गया घेराबंदी के लिए ‘विट क्लॉथ
बता दें कि इस थर्मल इमेजिंग सिस्टम के द्वारा जब टाइगर सहित अन्य पशुओं के लोकेशन का पता चलता है, तब ‘विट क्लॉथ’ के द्वारा लोकेशन के चारों ओर की घेराबंदी कर दी जाती है और एक कोने पर केज अथवा पिंजरा लगा दिया जाता है. इसमें भटके हुए पशु बंद हो जाते हैं.
इस सिस्टम को अपनाने से एनिमल टू एनिमल कनफ्लिक्ट अथवा एनिमल टू मैन कनफ्लिक्ट के ग्राफ में काफी कमी आई है. गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रणाली में इस्तेमाल किए जाने वाले ‘विट क्लॉथ’ को अहमदाबाद से मंगाया गया है. इसमें इस्तेमाल होने वाला कपड़ा विशेष रूप से तैयार होता है. जिसके सहारे पशुओं के लोकेशन के चारों ओर घेराबंदी कर दी जाती है.
.
FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 17:06 IST






