
नीरज कुमार/बेगूसराय : कहते हैं संघर्ष से ही कार्यशैली और जीवन में परिवर्तन आता है. आज के पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं का घर की दहलीज से निकलकर किसी कारोबार में हस्तक्षेप करते हुए आगे बढ़ाना किसी संघर्ष से कम नहीं होता है. ऐसी महिलाओं को समाज के ताने भी सुनने पड़ते हैं. बेगूसराय की महिला ने समाज की रूढ़ीवादी सोच का परवाह किए बगैर संघर्ष और मेहनत के दम पर समाज के लिए नजीर पेश करने का काम किया है.
यह महिला बेगूसराय जिले के मंसूरचक प्रखंड की रहने वाली आशा देवी है. आशा समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. इनकी बदली हुईं सोच महिलाओं के लिए सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरणास्त्रोत्र का काम कर रही है. फनीर्चर के कारोबार को शुरू कर आशा कमाई कर रही है. इनका सालाना टर्नओवर सात लाख से अधिक है.
समाज से ताना मिलने के बाद भी विचलित नहीं हुई आशा
आशा देवी ने लोकल 18 को बातया कि साल 2015 पति का काम ठप हो गया और परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा. कमाई का सारा श्रोत बंद हो गया. पति बढ़ई का काम करते थे. फर्नीचर से जुड़े कार्य को हीं आगे बढ़ाने का निर्णय लिया. पति के साथ मिलकर हाथ में रंदा पकड़ लिया और मेहनत करना शुरू कर दिया. इस दौरान समाज से ताने भी सुनने को मिला. लेकिन इन सब से विचलित हुए बगैर काम करते रहे. मेहनत रंग लाया और काम चल निकला.
अभी लकड़ी से कुर्सी, पलंग, दीवान, टेबल, खिड़की सहित अन्य सामान बनाकर बिक्री कर रहे हैं. अब आशा देवी सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं. फर्नीचर बनाने के लिए स्थानीय बाजार से हीं लकड़ी खरीदती हैं और इनका फर्नीचर बेगूसराय के साथ-साथ समस्तीपुर में बेची जाती है.
सात लाख है फर्नीचर के कारोबार का सालाना टर्नओवर
आशा देवी एवं उनके पति महेश शर्मा के मुताबिक शुरूआती दौरान फर्नीचर का सामान बिक्री करने में परेशानी तो हुई, लेकिन जल्द हीं यह दूर भी हो गया. बेहतर कारीगिरी को देखकर लोग प्रभावित हुए और ऑर्डर मिलना शुरू हो गया. आशा देवी ने बताया कि अभी फर्नीचर का सालाना टर्नओवर सात लाख से अधिक है. वहीं इस कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए जीविका से एक लाख की मदद भी ली. आशा देवी ने बताया कि 7 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है और इस पूरे कारोबार का मॉनिटरिंग अब ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष कुमार कर रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 17:00 IST






