महिला प्रोफेसर बनी गरीब बेटियों का सहारा, अब तक 30 लड़कियों की करा चुकी हैं शादी

प्रदीप कश्यप/सतना. जिले के शासकीय शहीद पदमधर सिंह महाविद्यालय में प्रोफेसर क्रांति मिश्रा ने अपना पूरा जीवन छात्र जीवन को समर्पित किया है. उनकी मानें तो वह एक सफल महिला शिक्षक हैं जो छात्र छात्राओं को उनकी शिक्षा दीक्षा के साथ-साथ उनके अंदर संस्कार का निर्माण करती हैं. प्रोफेसर क्रांति मिश्रा ने अभी तक अपने निजी खर्च से करीब 30 बेटियों के हाथ पीले कराए हैं. इसके अलावा करीब 50 से अधिक छात्राओं के पढ़ाई का पूरा खर्च वहन कर रही हैं.

उनकी मदद से आज कई छात्राएं डॉक्टर, इंजीनियर भी बन चुकी हैं. इसके अलावा प्रो. क्रांति करीब 15 सौ पौधरोपण भी कर चुकी हैं और वह अपने कुशल नेतृत्व की वजह से कई सामाजिक संगठनों में  पदाधिकारी पद पर हैं.

इस बारे में छात्रा अर्चना कुशवाहा एवं पूनम अग्निहोत्री ने बताया कि मैंम को हम सभी मां और माई कहकर पुकारते हैं. हम सभी बहनों की क्रांति मां हर जरूरतों को पूरा करती हैं. वह शिक्षा के साथ उनकी हर संभव मदद करती हैं. जब शिक्षक की जरूरत पड़ी तो उन्होंने गुरु की तरह मार्गदर्शन दिया है और जब भी मां की जरूरत पड़ी तो वह मां की तरह साथ देती हैं. वह हर इच्छा पूरी करती हैं. हम सभी को मैम से प्रेरणा मिलती है कि हम भी उनके जैसा आगे चलकर कुछ अच्छा कर सकें.

हर साल दो बेटियों की कराती हैं शादी

प्रोफेसर क्रांति मिश्रा की मानें तो इस कार्य की प्रेरणा उन्हें अपने पिता स्व. दयाशंकर जी से प्राप्त हुई. पिता गांव के जमींदार हुआ करते थे और वह अक्सर ग्रामीणों के सुख दुःख में हर संभव मदद करते थे. ऐसे में उनकी प्रेरणा से प्रेरित होकर वह बचपन से लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटती थीं. उन्होंने पहली बार अपनी बुआ की बेटियों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया था. उसके बाद वह बेटियों की मदद के लिए हमेशा अग्रसर रहती हैं. उन्होंने हर वर्ष गरीब एवं निर्धन 2 बेटियों की हाथ पीले कराने का जिम्मा उठा रखा है.

मां और माई कहकर पुकारती हैं बेटियां

अभी तक करीब 30 बेटियों के हाथ पीले करा चुकी है. साथ ही करीब 50 छात्राओं के पढ़ाई का पूरा खर्च खुद वहन कर चुकी हैं. उनकी माने तो जब उन्हें बेटियां मां और माई कहकर पुकारती है तो उन्हें अपने बच्चों को अनुभूति प्राप्ति होती हैं. वह बच्चों के लिए हमेशा समर्पित रहती हैं.

क्रांति मिश्रा मध्यप्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से गांव महराजपुर में जन्मी थीं. उनके पिता एक जमीदार थे, करीब 18 वर्षों तक उनके पिता गांव के सरपंच थे. प्रो. क्रांति मिश्रा के पति DAV पीजी कालेज उत्तरप्रदेश में प्रोफेसर पद पर पदस्थ हैं. उनके दो बच्चे भी है, जिसमें सबसे बड़ी बेटी 23 वर्ष की सिद्धि मिश्रा जो कि MPPSC की तैयारियों में जुटी हुई हैं और छोटा बेटा 20 वर्ष श्रेष्ठ मिश्रा BBA की पढ़ाई में अध्यनरत हैं. जून 2012 से प्रोफेसर सतना के रीवा रोड स्थित शहीद पद्मधर सिंह शासकीय महाविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं. अभी क्रांति मिश्रा 59 वर्ष की हो चुकी हैं. वर्तमान में वह शहर के रीवा रोड स्थित नेमा कैम्पस में निवासरत हैं.

Tags: Local18, Mp news, Satna news

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More