हाइलाइट्स
दुनियाभर में ऐसे कई स्वयंभू देश हैं, जिन्होंने खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर रखा है.
इन माइक्रोनेशन की आबादी 30 से लेकर 30 हजार तक है.
इन देश छोटे-से देशों के पास अपनी मुद्रा और पासपोर्ट तक है.
Micronations: क्या कोई आदमी खुद का देश बसा सकता है, जहां सिर्फ उसका शासन , मुद्रा और नियम-कानून हो? ज्यादातर लोग सोचेंगे कि ऐसा कैसे संभव है, लेकिन कुछ लोगों ने यह मुमकिन कर दिखाया है. इन लोगों ने ना सिर्फ अपना देश बसाया बल्कि अपना झंडा, राष्ट्रगान, मुद्रा और पासपोर्ट भी जारी किया है. हालांकि, इन माइक्रोनेशंस को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मान्यता नहीं दी है. दुनिया में कुल 193 देश हैं जो यूएन के सदस्य हैं. फिर भी इन ‘स्वयंभू राष्ट्र’ में लोग मजे से जिंदगी जी रहे हैं.
दुनियाभर में कई ऐसे स्वयंभू देश हैं, जिन्होंने खुद को स्वतंत्र देश घोषित कर रखा है. हैरानी की बात है कि इन देशों में से कुछ की आबादी तो 500 या उससे भी कम है. इन दिनों Republic of Slowjamastan की काफी चर्चा हो रही है. यह देश अमेरिका में स्थित और इसे रैंडी विलियम्स नाम के व्यक्ति ने बसाया है. यह शख्स खुद को “स्लोजामास्तान के सुल्तान” के रूप में पेश करता है. इसके अलावा भी दुनिया में कई माइक्रोनेशन हैं. आइये आपको बताते हैं आखिर कैसे माइक्रोनेशन बसाया जा सकता है.
क्या होते हैं माइक्रोनेशन
माइक्रोनेशन शब्द का पहली बार प्रयोग 1970 के दशक में किया गया था. वर्ल्ड एटलस साइट के अनुसार, माइक्रोनेशन ऐसे छोटे देश हैं जो स्वयं के संप्रभु राष्ट्र होने का दावा करते हैं लेकिन किसी अन्य सरकार या प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. इनमें से कुछ छोटे देशों ने पासपोर्ट, डाक टिकट, सिक्के, पदक और अपने झंडे जारी कर दिए हैं. इन माइक्रोनेशन का दुनिया के दूसरे किसी देशों के साथ न तो कोई राजनयिक संबंध होता है और न ही उन देशों के साथ कोई कारोबार होता है. माइक्रोनेशन कई कारणों से बनाए जाते हैं. हालांकि, ज्यादातर ये छोटे देश व्यक्तिगत शौक और मनोरंजन के लिए स्थापित किए गए हैं, और वे देश के रूप में UN से मान्यता नहीं चाहते हैं. वहीं, कुछ माइक्रोनेशन अपनी अलग पहचान की मांग करते आए हैं.

इन छोटे देशों के कई शासक UN तक पहुंच चुके हैं और अपने अलग देश को मान्यता देने की मांग कर रहे हैं. गूगल माइक्रोनेशन मैप के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक ऐसे स्वयंभू देशों की संख्या 67 तक पहुंच चुकी है. हैरानी की बात है कि इन माइक्रोनेशन का कुल क्षेत्रफल महज 1 एकड़ है, इससे कई गुना तो लोगों के पास जमीन होती है.
क्या कोई व्यक्ति बसा सकता है अपना देश
अमेरिका में स्थित माइक्रोनेशन ‘द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ स्लोजमास्तान’ इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है. रैंडी विलियम्स नाम के शख्स ने अपना ‘देश’ बनाने के लिए कैलिफोर्निया के रेगिस्तान में खाली जमीन का 11.07 एकड़ भूखंड $19,000 यानी 15,66,920 में खरीदा और 1 दिसंबर 2021 को अपने देश की स्थापना कर दी.

इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या खुद की जमीन खरीदकर माइक्रोनेशन बसाया जा सकता है. चूंकि दुनिया में कई जगहों पर ऐसा किया गया है. लेकिन यह संभव नहीं है, क्योंकि ज्यादातर माइक्रोनेशन को व्यक्तिगत मनोरंजन और शौक के लिए बसाया जाता है. किसी भी देश को मान्यता संयुक्त राष्ट्र के मोंटेवीडियो कंवेशन 1933 (Montevideo Convention of 1933) के आधार पर दी जाती है और उसके आधार पर ही दुनिया के अन्य देशों के साथ उसके राजनायिक संबंध तय होते हैं.
कुछ प्रसिद स्वयंभू राष्ट्र
दुनियाभर में मौजूद कई माइक्रोनेशन में मोलोसिया गणराज्य की काफी चर्चा होती है. 1999 में इसकी स्थापना की गई थी. महज 0.0053 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला यह उपराष्ट्र अमेरिकी प्रांत नेवाडा के पास है. इस गणराज्य की अपनी डाक सेवा, बैंक, पर्यटक सेवा, नौसेना, अंतरिक्ष कार्यक्रम, रेल, ऑनलाइन फिल्म थियेटर भी है. 2008 के बाद से यहां पर्यटकों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था.
इंग्लैंड के तट पर बसा सीलैंड भी एक माइक्रोनेशन है. 1970 में इस छोटे-से देश की आबादी 70 तक पहुंच गई है लेकिन आज यहां करीब 27 लोग रहते हैं. क्रोएशिया और सर्बिया के बीच बसा लिबेरलैंड भी एक छोटा-सा देश है, जिसने स्वयं को अप्रैल 2015 में स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. इस देश की आबादी करीब ढाई लाख है. खास बात है कि यहां पर अपना टैक्स, प्रॉपर्टी कानून और नागरिक अधिकार लागू हैं. इसके अलावा भी दुनिया में कई माइक्रोनेशन मौजूद हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 13:57 IST









