बागवानी बनी वरदान; सरकारी अनुदान से खुशहाल हो रहा हरियाणा का किसान

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परमजीत तूर/टोहाना: आज किसान परंपरागत खेती को छोड़ बागवानी और आधुनिक खेती का रुख कर रहे हैं, जिससे न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि किसानों के साथ-साथ प्रकृति को भी फायदा हो रहा है. हरियाणा की बात करें तो प्रदेश में ज्यादातर किसान आज भी परंपरागत खेती ही करते हैं, लेकिन कुछ किसान बागवानी कर ऐसे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं. बागवानी कर रहे किसानों को लाभ भी मिल रहा है.

सरकार भी देती है अनुदान
सरकार किसानों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है कि वे परंपरागत खेती को छोड़कर चना, मूंग, दाल, मक्का, सरसों और सूरजमुखी के अलावा पानी की कम लागत वाली फसलों की बुवाई करें. इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जाती है. वहीं, इसके अलावा किसानों को बागवानी के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है और बागवानी करने पर भी उन्हें अनुदान दिया जाता है. वहीं किसानों का कहना है कि बिना ज्यादा मेहनत के किसान प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपए तक कमाई कर सकता है.

बागवानी से आमदनी 2 गुना बढ़ी
सरकार के प्रोत्साहन का नतीजा भी देखने को मिल रहा है. टोहाना के गांव डांगरा व बिडाई खेड़ा में किसान बागवानी की ओर दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इस इलाके में लगभग 300 एकड़ में अमरूद के बगीचे लगाए जा चुके हैं. इनमें से अधिकतर बगीचे बीते तीन-चार वर्षों से फल दे रहे हैं तथा किसानों की आमदनी 2 गुना बढ़ चुकी है. कम लागत से किसान को अच्छा फायदा हो रहा है.

किसानों के साथ बागवानी से प्रकृति को भी फायदा
किसानों का कहना है कि बागवानी से न केवल उन्हें फायदा मिल रहा है. उनके साथ-साथ प्रकृति को भी फायदा मिल रहा है. क्योंकि आज प्रदूषण के दौर में पेड़ पौधे हमें शुद्ध ऑक्सीजन देने का काम करते हैं. साथ ही धान, गेहूं की फसल की तुलना में बागवानी से अच्छी आमदनी हो जाती है. इसके अलावा मेहनत भी कम लगती है. गेहूं या धान की खेती के लिए माफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है. बागवानी में पानी भी कम लगता है.

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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 17:09 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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