
प्रसिद्ध गीतकार और शायर जावेद अख्तर को शायरी विरासत में मिली है. उनके पिता जां निसार अख्तर खुद एक बड़े शायर, कवि और गीतकार रहे हैं. जां निसार अख्तर साहब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए किया और गोल्ड मेडल हासिल किया. वे ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर रहे. इसके बाद भोपाल के हमीदिया कॉलेज में उर्दू विभाग के अध्यक्ष पद पर रहे. जां निसार अख्तर साहब की रचनाओं एक अलग ही नजाकत और नफासत नजर आती है.
उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे
उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे
जिन्दगी राम का वनवास लगे
तू कि बहती हुई नदिया के समान
तुझको देखूं तो मुझे प्यास लगे
फिर भी छूना उसे आसान नहीं
इतनी दूरी पे भी, जो पास लगे
वक्त साया-सा कोई छोड़ गया
ये जो इक दर्द का एहसास लगे
एक इक लहर किसी युग की कथा
मुझको गंगा कोई इतिहास लगे
शेर-ओ-नग़्मे से ये वहशत तेरी
खुद तिरी रूह का इफ़्लास लगे
(इफ़्लास=कंगाली)
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जब लगें जख्म तो कातिल को दुआ दी जाए
जब लगें जख्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए
दिल का वो हाल हुआ है ग़म-ए-दौरां के तले
जैसे इक लाश चटानों में दबा दी जाए
इन्हीं गुल-रंग दरीचों से सहर झांकेगी
क्यूं न खिलते हुए जख़्मों को दुआ दी जाए
कम नहीं नश्शे में जाड़े की गुलाबी रातें
और अगर तेरी जवानी भी मिला दी जाए
हम से पूछो कि गज़ल क्या है गज़ल का फ़न क्या
चंद लफ़्जों में कोई आग छुपा दी जाए
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हर लफ़्ज तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है
हर लफ़्ज तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है
ये तर्ज, ये अन्दाज-ए-सुखन हमसे चला है
अरमान हमें एक रहा हो तो कहें भी
क्या जाने, ये दिल कितनी चिताओं में जला है
अब जैसा भी चाहें जिसे हालात बना दें
है यूं कि कोई शख़्स बुरा है, न भला है
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अच्छा है उन से कोई तकाजा किया न जाए
अच्छा है उन से कोई तकाज़ा किया न जाए
अपनी नजर में आप को रुस्वा किया न जाए
हम हैं तिरा खयाल है तेरा जमाल है
इक पल भी अपने आप को तन्हा किया न जाए
उठने को उठ तो जाएँ तिरी अंजुमन से हम
पर तेरी अंजुमन को भी सूना किया न जाए
उन की रविश जुदा है हमारी रविश जुदा
हम से तो बात बात पे झगड़ा किया न जाए
हर-चंद ए’तिबार में धोके भी हैं मगर
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए
लहजा बना के बात करें उन के सामने
हम से तो इस तरह का तमाशा किया न जाए
इनआ’म हो ख़िताब हो वैसे मिले कहां
जब तक सिफारिशों को इकट्ठा किया न जाए
इस वक़्त हम से पूछ न गम रोज़गार के
हम से हर एक घूंट को कड़वा किया न जाए
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Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature
FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 16:58 IST








