
आशीष शर्मा/यमुनानगर. यमुनानगर के सुखराम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है, क्योंकि वो किसी मसीहा से भी कम नहीं है.सुखराम यमुना नदी में डूबते कई लोगों की जिंदगी बचा चुके है . इतना ही नहीं कई शवों को भी नदी से बाहर निकाल चुके है हैं.सुखराम अब तक करीब 6 हजार लोगों को यमुना नदी से बाहर निकाल चुके है . जिनमें लोगों की जान बचाना और शव निकालना शामिल है.
सुखराम 16 साल की उम्र से ही ये काम कर रहे है . सुखराम की पहचान इसलिए भी है क्योंकि आज तक इन्होंने कभी किसी शव या किसी शख्स की जान बचाने के लिए पैसे नहीं लिए.सुखराम ये सब सेवा- भाव से करते आ रहे है . सुखराम का कहना है कि उनके बड़े भाई ने जबरन तैरना सिखाया, आज उनका इतना स्टेमिना है कि 16 किलोमीटर बिना रुके और थके लंबी तैराकी कर लेते हैं.
एतिहासिक सिक्के एकत्र करने के शौकीन है सुखराम
सुखराम के पास ऐतिहासिक सिक्के यानी मुगल काल,अंग्रेजी शासन से लेकर चाइनीज सिक्कों की भरमार है. यहां तक की हाथ से बने हुए सिक्के भी सुखराम के पास हैं. सुखराम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है इसलिए वे ये भी नहीं जानते कि इन सिक्कों की आज के दौर में क्या कीमत है. सुखराम ने करीब ढाई लाख रुपए के सिक्के नीलामी के जरिए बेचे हैं और अभी भी उनके पास करीब 70 किलो सिक्के मौजूद हैं. सुखराम ने पेपर की वो कटिंग भी संभाल कर रखी हुई है, जिसमें उन्हें सम्मानित किया गया है और सरकार की तरफ से चेक दिया गया था.
हरियाणा सरकार भूल गई अपना वादा
सुखराम को प्रशासन की तरफ से कई बार सम्मानित किया जा चुका है. ओमप्रकाश चौटाला सरकार के समय नौकरी का ऑफर भी सुखराम को मिला था लेकिन दुख की बात है की उन्हे आज तक नौकरी नहीं मिली. हालांकि उन्होने इस पेशे को शौक बना लिया है. जो अपने आप में रोमांचक भी है और प्रेरणादायक भी.
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FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 12:55 IST








