Explainer : टीम इंडिया की स्पॉन्सर बायजूस क्यों है मुसीबत में? कोविड में खूब बढ़ी कंपनी, फिर फंसी विवादों में

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हाइलाइट्स

कोरोना के बाद कंपनी के कारोबार में गिरावट आई है.
बायजूस को अब कर्ज चुकाने में कठिनाई हो रही है.
टीएलपी का पैसा चुकाने से कंपनी ने मना कर दिया है.

नई दिल्‍ली. भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) की स्‍पॉन्‍सर एडटेक कंपनी बायजूस (BYJU’s) अब गहरे संकट में फंसे हुई है. पौने 2 लाख करोड़ रुपये वैल्‍यूएशन (BYJU’s Valuation) वाली कंपनी की हालत आज यह है कि वह अपना कर्ज भी नहीं चुका पा रही है. बायजू रवींद्रन द्वारा बनाई इस कंपनी के बुरे दिन तभी शुरू हो गए थे जब कंपनी ने वित्‍त वर्ष 2021 के अपने वित्‍तीय आंकड़े 18 महीने की देरी से जारी किए. नतीजे जारी करने में हुए इस विलंब से निवेशकों को गड़बड़झाले का अंदेशा हुआ. इनवेस्‍टर ही नहीं सरकार को भी दाल में कुछ काला नजर आया. यही कारण था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का छापा भी कंपनी परिसरों के साथ फाउंडर बायूज रविंद्रन (Byju Ravindran) के ठिकानों पर इस साल पड़ चुका है.

साल 2011 में बायजू रवींद्रन ने थिंक एंड लर्न नाम से कंपनी बनाई और कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के छात्रों को कोचिंग देने की शुरुआत की. 4 साल बाद 2015 में कंपनी ने बायजूस (BYJU’s) के नाम से लर्निंग ऐप लॉन्च किया. मार्च 2018 में बायजूस यूनिकॉर्न बन गई है. 2019 में Byju’s भारतीय क्रिकेट टीम की आधिकारिक स्पॉन्सर बनी. जून 2020 में Byju’s दुनिया में सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाला एडटेक स्टार्टअप बन गई. इस समय कंपनी की वैल्यूएशन 85 हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी थी.

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कोरोना खत्‍म, बायजूस की मुसीबत शुरू
कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगा तो विद्यार्थियों का स्‍कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर जाना बंद हो गया. कोरोना महामारी के दौर में बायजूस का बिजनेस खूब बढ़ा. उसी दौरान Byju’s ने तेजी से अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए कई स्टार्टअप्स शुरू किए. कंपनी ने आकाश इंस्टीट्यूट, आई रोबोट ट्यूटर, हैशलर्न, व्हाइट जूनियर और टॉपर जैसी कई कपंनियों का अधिग्रहण भी किया. उसने अपने कर्मचारियों की संख्‍या में भी खूब इजाफा किया. लेकिन, कोरोना महामारी के समाप्‍त होते ही बायजूस की मुश्किलें शुरू हो गईं. छात्रों का रुझान ऑनलाइन कोचिंग से कम हुआ और उन्‍होंने फिर से कोचिंग सेंटर्स जाना शुरू कर दिया. इसके चलते जितनी तेजी से Byju’s का कारोबार ऊंचाइयों पर पहुंची था, उसी तेजी से नीचे आना भी शुरू हो गया.

बायजूस ने 18 महीने की देरी के बाद जब सिंतबर 2022 में अपने वित्‍तीय आंकड़े जारी किए तो उससे कंपनी की आर्थिक सेहत की पोल भी खुल गई. कंपनी के आंकड़ों से पता चला कि बायजूस को वित्‍त वर्ष 2021 में 4,589 करोड़ का घाटा हुआ. यही नहीं उसकी आय भी 30 फीसदी गिरकर 2,428 करोड़ पर पहुंच गई. ये आंकड़े कंपनी में पैसा लगाने वालों के लिए किसी झटके से कम नहीं थे. साथ ही कंपनी की फंडिंग हासिल करने की राह में भी ये रोड़ा बन गए. Byju’s में कॉरपोरेट गवर्नेंस, बहीखातों में गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर छंटनी जैसी दिक्कतें भी जारी हैं.

अधिग्रहण ने किया बेड़ा गर्क
बायजूस ने दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण पर खूब पैसा खर्च किया. बायजूस ने $300 मिलियन में व्‍हाइट हेट जेआर को खरीदा. इसी तरह अगस्‍त 2020 में आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदने में 7300 करोड़ रुपये खर्च किए. टॉपर्स के अधिग्रहण में $150 और स्‍कॉलर्स को खरीदने में $2.5 बिलियन का निवेश किया. इसी तरह सिंगापुर बेस्‍ड ग्रेट लर्निंग को भी $600 मिलियन में खरीदा. इन बड़ी डील के कारण कंपनी पर भारी कर्ज चढ़ गया. ऊपर से कोरोना खत्‍म होते ही कारोबार भी मंदा हो गया और बायजूस भारी संकट में आ गई.

कर्ज चुकाने से इंकार
कर्जदाता टीएलबी को बायजूस ने उसका 1.2 बिलियन डॉलर का कर्ज चुकाने से इंकार कर दिया है. बायजूस ने इस कर्ज को लेकर अमेरिका की न्‍यूयार्क कोर्ट में केस दायर कर रखा है. कंपनी का कहना है कि केस का फैसला आने तक वह टीएलबी को पैसा नहीं देगी. इससे पहले बायजूस ने टीएलबी से उसका लोन रिस्‍ट्रक्‍चर करने की गुहार लगाई थी.

बायजूस ने भारत में ऑनलाइन एजुकेशन बिजनेस में गिरावट को आधार बनाकर लोन रिस्‍ट्रक्‍चर करने को कहा था. लेकिन, टीएलबी ने उसकी यह बात नहीं मानी. यही नहीं बायजूस को ब्‍लैकस्‍टोन से लिए 1,983 करोड़ रुपये के लोन को चुकाने में भी परेशानी हो रही है. कंपनी ने यह कर्ज आकाश एजुकेशनल सर्विसेज का अधिग्रहण करने के लिए लिया था.

ईडी पड़ा है पीछे
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट यानी फेमा के प्रावधानों के तहत बायजू रवींद्रन और उनकी कंपनी थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. ईडी बायजूस को हासिल हुई एफडीआई, उसके द्वारा एफडीआई के नाम पर विदेश भेजे गए पैसे और विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च की जांच कर रही है. जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी के दिखाए आंकड़े कितने सही हैं, ये जानने के लिए उनका मिलान बैंकों के आंकड़ों से किया जा रहा है. वहीं, ईडी के छापे पर बायजूस के मालिक बायजू रविंद्रन ने कहा कि कंपनी ने कुछ भी गलत नहीं किया है और हमें पूरा भरोसा है कि ED अपनी जांच में कंपनी को नियमों का पालन करने वाला पाएगी.

Tags: Business news in hindi, Company

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Author: Up Head Line

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