Science News: अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिकों के ब्रेन पर पड़ रहा बुरा असर, कैंसर का भी बड़ा खतरा, पढ़ें नासा की चौंकाने वाली स्टडी

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हाइलाइट्स

अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिकों के ब्रेन पर पड़ रहा बुरा असर.
स्पेस में वैज्ञानिकों का ब्रेन कुछ अलग तरह से मॉडिफाई हो जाता है.
अंतरिक्ष में जाने वाले वैज्ञानिकों को कैंसर का भी बड़ा खतरा है.

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की यात्रा करने वालों के ब्रेन पर एक नया शोध किया है. वैज्ञानिकों ने बताया कि स्पेस में जाने वाले वैज्ञानिकों के ब्रेन पर बुरा असर पड़ रहा है. शोध के मुताबिक स्पेस में वैज्ञानिकों का ब्रेन कुछ अलग तरह से मॉडिफाई हो जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि वहां ग्रेविटी नहीं है. यह स्टडी नासा द्वारा की गई है. शोधकर्ताओं ने गुरुवार को कहा कि कम से कम छह महीने तक चलने वाले मिशनों पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) या नासा अंतरिक्ष शटल पर यात्रा करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों ने सेरेब्रल वेंट्रिकल्स के फैलने का अनुभव किया. यह हमारे मस्तिष्क के बीच की जगह पर है, जिसमें सेरेब्रोस्पाइनल नाम का तरल पदार्थ मौजूद होता है. पानी जैसा यह तरल पदार्थ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में और उसके आसपास बहता है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड ब्रेन को अचानक प्रभाव से बचाने में मदद करने के लिए मस्तिष्क को कुशन करता है. 30 अंतरिक्ष यात्रियों के मस्तिष्क स्कैन के आधार पर, शोधकर्ताओं ने पाया कि वेंट्रिकल्स को इस तरह की यात्राओं के बाद पूरी तरह से ठीक होने में तीन साल लग गए. वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिया कि किसी भी अंतरिक्ष मिशनों को पूरा करने के लिए कम अवधि ही निर्धारित करना उचित उपाय रहेगा.

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शरीर विज्ञान और काइन्सियोलॉजी के प्रोफेसर और वरिष्ठ लेखक राचेल सीडलर ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों में वेंट्रिकुलर विस्तार का प्रभाव वर्तमान में ज्ञात नहीं है. यह वेंट्रिकुलर विस्तार संभवतः आसपास के मस्तिष्क के ऊतकों को संकुचित करता है, या हो सकता है पृथ्वी की तरह वहां ग्रेविटी न होने की वजह से ब्रेन मॉडिफाई होता है. हमारे वैस्कुलर सिस्टम में वाल्व होते हैं जो ग्रेविटी के कारण हमारे सभी तरल पदार्थों को हमारे पैरों पर जमा होने से रोकते हैं और यह माइक्रोग्रैविटी में विपरीत होता है यानी तरल पदार्थ सिर की ओर शिफ्ट हो जाते हैं.

इस अध्ययन में अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसियों के 23 पुरुष और सात महिला अंतरिक्ष यात्रियों को शामिल किया गया था जिनकी औसत उम्र 47 के आसपास थी. आठ यात्री लगभग दो सप्ताह के अंतरिक्ष यान मिशन पर थे. 18 लगभग छह महीने के ISS मिशन पर थे और 4 लगभग एक साल के ISS मिशन पर थे. छोटे मिशनों के बाद अंतरिक्ष यात्रियों में सेरेब्रल वेंट्रिकल्स में बहुत कम या कोई परिवर्तन नहीं हुआ. छह महीने या उससे अधिक समय के मिशन के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के ब्रेन में अंतर दिखा.

माइक्रोग्रैविटी की स्थिति मानव शरीर पर कम शारीरिक भार के कारण अन्य शारीरिक प्रभाव भी पैदा करती है. इनमें हड्डी और मांसपेशी, हृदय संबंधी परिवर्तन, कान और आंखों से जुड़ी समस्याएं पैदा होने लगती हैं. सौर विकिरण के अधिक जोखिम से कैंसर का खतरा बढ़ना भी एक चिंता का विषय है.

Tags: Nasa study, Science news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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