Congress के नाम पर कैसे पड़ा घास का नाम? एक बार उग जाए तो खत्म करना मुश्किल! जानिए अमेरिका से कैसे आई भारत

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आपको लगता होगा कि दुनिया में जितने भी पेड़-पौधे हैं, सब बड़े काम के हैं. उनके उगने से पर्यावरण को फायदा होता होगा. पर ऐसा नहीं है. कुछ पेड़-पौधे ऐसे हैं, जो समाधान से ज्यादा समस्या होते हैं. ऐसी ही एक घास है जो यूं तो विदेशी है, पर गलती से भारत में प्रवेश कर जाने के बाद आज के वक्त में वो भारत के लगभग हर हिस्से में फैल चुकी है और खेती के लिए समस्या साबित होती है. इस घास को लोग ‘कांग्रेस घास’ (What is Congress Grass) के नाम से जानते हैं!

जी हां, इस घास का नाम राजनीतिक पार्टी कांग्रेस से जुड़ा है. आखिर घास का नाम कांग्रेस से क्यों जुड़ा है? इसका जवाब देने से पहले आपको जान लेना चाहिए कि आखिर कांग्रेस घास (How Congress Grass reach India) क्या है. ये एक तरह की खरपतवार है जिसका जन्म भारत में नहीं, बल्कि मेक्सिको में हुआ था. पर ये गलती से भारत चली आई. काफी 50-60 साल पहले जब भारत ने अमेरिका से गेहूं मंगवाया था, तो उसके साथ ये घास भी देश में चली आई थी. देखते ही देखते ये तमाम राज्यों में फैल गई.

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ये घास मेक्सिको में पैदा हुई और भारत तक आ गई. (फोटो: Canva)

भारत कैसे पहुंची कांग्रेस घास?
इसे वैज्ञानिक रूप से पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस (Parthenium hysterophorus) के तौर पर जाना जाता है. जब भारत में गेहूं पहुंचे तो एक शहर से दूसरे शहर ले जाने के चक्कर में ये अन्य शहरों तक पहुंच गए. इस घास से अन्य पेड़-पौधों के उगने में समस्या होती है इस वजह से इसे बीमारी के तौर पर भी जाना जाता है. कांग्रेस घास को लोग गाजर घास (Carrot Grass) और चटक चांदनी के तौर पर भी जानते हैं. ये घास इंसानों की स्किन के लिख खतरनाक होती है. इससे डरमेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा जैसी बीमारियां हो जाती हैं. पशुओं के लिए भी ये खरपतवार उपयुक्त नहीं है. कांग्रेस घास इतनी तेजी से फैलती है कि दूसरे उपयोगी पौधों और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

कैसे पड़ा कांग्रेस पार्टी पर नाम?
कांग्रेस घास की लंबाई 0.5 से एक मीटर तक होती है. इसका तना रोएंदार और अत्यधिक शाखायुक्त होता है. पत्तियां असमान्य रूप से गाजर की पत्तियों की तरह होती हैं. अब जब आपने इसके बारे में इतना कुछ जान लिया है तो चलिए आपको ये भी बता देते हैं कि इसका काम कांग्रेस के नाम पर क्यों पड़ा. गाजर घास को ‘कांग्रेस घास’इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये 1950 के दशक में भारत पहुंची थी. उस वक्त कांग्रेस का शासन था. उस दौर में अमेरिका से मिले पीएल-480 किस्म के गेहूं के साथ इसका प्रवेश हमारे देश में हुआ था.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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