पीवीआर आईनॉक्‍स 50 स्‍क्रीन्‍स बंद कर रहा? जानिए क्यों हो रहा ऐसा

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हाल ही में पीवीआर आईनॉक्‍स ने घोषणा की है कि वो अगले छ: माह में घाटे में चल रही 50 स्‍क्रीन बंद करने जा रहा है. पहले से ही वेंटिलेटर पर चल रहे भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए ये खबर किसी सदमे से कम नहीं है. कोरोना की मार, ओटीटी प्‍लेटफार्म की बढ़ती लोकप्रियता और सोशल मीडिया के हमले झेल रहा भारतीय सिनेमा आईसीयू से बाहर आने के लिए हाथ पैर मार ही रहा था कि 50 स्‍क्रीन की तालाबंदी के फैसले ने उसका बुखार फिर से बढ़ा दिया. सूत्रों की मानें तो भारत में 12 हजार से अधिक सिनेमा घर हैं, जिनमें से आधे दक्षिण में हैं. एक और खबर कहती है कि भारत में लगभग 9,600 स्‍क्रीन हैं, इनमें से लगभग 2950 मल्‍टीप्‍लेक्‍स हैं. सवाल जायज़ है कि ‘2950 में से 50 स्‍क्रीन कम होने पर इतनी हायतौबा का क्‍या मतलब है?’ 50 स्क्रीन 2950 का दो परसेंट से भी कम 1.69 ही तो होता है, फिर माजरा क्‍या है?

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बेशक ये प्रतिशत कम है, लेकिन जब, वैसे ही देश में सिनेमा स्‍क्रीन, जरूरत से बहुत ज्‍यादा कम हैं, ऐसे में स्‍क्रीन कम करना, गाड़ी को रिवर्स गियर में चलाने जैसा है, जिस गाड़ी के बारे में कहा जा रहा हो कि ये धीमे चल रही है, इसकी रफ्तार बढ़ना जरूरी है, वो गाड़ी पीछे की ओर चलने लगे तो कितना घातक होगा? ठीक उतनी ही मारक और घातक यह सूचना भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए है. दरअसल बंद करने से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण बात, बंद करने के कारण में छिपी है. पीवीआर आईनॉक्‍स ने स्‍क्रीन बंद करने का निर्णय इसलिए लिया है, क्‍योंकि मार्च तिमाही में कंपनी को 333.99 करोड़ का घाटा हुआ है. घाटा क्‍यों हुआ है? इसकी पड़ताल करते हैं.

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एक दर्शक की जुबानी, ”पहले तो गाड़ी ड्राइव करके, पेट्रोल खर्च करके थिएटर हॉल पहुंचो, फिर वहां महंगी टिकट के लिए जेब ढीली करो, महंगा पानी लो, 70 रुपये की चाय पियो, डेढ़ सो दो सौ रुपये का पॉपकार्न लो. परिवार के चार सदस्‍यों के साथ चले गए तो खर्च की कल्‍पना से डर लगता है, लेकिन चलो कोई नहीं दिल को तसल्‍ली देते हैं. आउटिंग भी तो जरूरी है और थिएटर में फिल्‍म देखने का मज़ा ही अलग होता है, लो साहब दिल तो बहल गया. ये सब चलेगा, लेकिन एक शर्त पर… शर्त है, फिल्‍म बढ़िया होनी चाहिए, फिल्‍म का पैसा वसूल होना जरूरी है.”

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‘फिल्‍म देखने के बाद बाहर निकले, पता चला कि फिल्‍म में तो दम ही नहीं था. सो निष्‍कर्ष पर पहुंचे कि ना बाबा, अब थिएटर नहीं आना. इससे अच्‍छा प्रोग्राम और बेहतर कंटेंट वाली फिल्‍म तो ओटीटी पर घर बैठे देखने को मिल जाती है, वो भी औसत 150-200 रुपये महीना खर्च करके. माना किसी ओटीटी पर ज्‍यादा पैसे लगते हैं, लेकिन कहीं फ्री भी तो है.’

पीवीआर आईनॉक्‍स की घोषणा इस अर्थ में भी मायने रखती है कि सिंगल स्‍क्रीन सिनेमा तो पहले ही बंद हो रहे हैं. अकेले महाराष्‍ट्र में 80 फीसदी सिंगल स्‍क्रीन थिएटर बंद हो चुके हैं. लेकिन पीवीआर आईनॉक्‍स का बार-बार जि़क्र हो रहा है. क्‍या दोनों कंपनियों ने मिलकर स्‍क्रीन बंद करने की घोषणा की है? बता दें कि PVR और Inox Leisure मल्‍टीप्‍लेक्‍स ब्रांड के दो सबसे बड़े खिलाड़ी हैं. हाल ही में इनका मर्जर हो गया है. अब ये दो अलग-अलग कंपनियां नहीं रहीं.

कंपनी का कहना है कि ‘बंद की जा रही स्क्रीन्स भारी घाटे में चल रही हैं. बावजूद इस तथ्‍य के कि घाटे वाली तिमाही में 1,143 करोड़ रुपये का बेहतर रेवेन्‍यु हासिल हुआ है. यह पिछले साल वाली इसी तिमाही की तुलना में लगभग दोगुना है. वहीं पिछले साल वाली इसी तिमाही में कंपनी का घाटा महज 105 करोड़ था, जो इस साल बढ़कर 333.99 करोड़ हो गया.

कंपनी के कथनानुसार घाटे में चल रहे स्‍क्रीन्‍स ऐसे मॉल्‍स में हैं, जहां ज्‍यादा फुटफॉल नहीं है. फुटफॉल इसलिए नहीं हैं, क्‍योंकि ये मॉल्‍स अपनी लाइफ साइकिल को पूरा कर चुके हैं और इनके रिवाइव करने की उम्‍मीद न के बराबर है. इसके चलते रिकवरी होने की संभावनाएं भी नगण्‍य हैं. सूत्र कहते हैं, इस स्‍क्रीन बंदी से कंपनी को 10 करोड़ की बचत होगी.’ अच्‍छी खबर ये है कि PVR INOX बंदी की स्‍ट्रेटजी पर चलते हुए भी, दूसरी दिशा में सक्रिय रहेंगे और कारोबार का विस्तार जारी रखेंगे. मौजूदा वित्‍त वर्ष में कंपनी ने 160-175 नई स्‍क्रीन्‍स खोलने की योजना का खुलासा भी किया है. विलय के बाद इस कंपनी के पास 1670 से अधिक स्‍क्रीन हो गए हैं.

दिलचस्‍प विरोधाभास ये है कि इस तिमाही में लंबे सूखे के बाद बॉलीवुड ने बॉक्‍स ऑफिस पर धन की जोरदार बारिश की. दिसंबर के अंतिम दिनों में रिलीज़ शाहरूख की ‘पठान’ ने पुराने रिकार्डों को ध्‍वस्‍त करते हुए बम्‍पर कमाई की और बॉलीवुड को संजीवनी भी दी. इससे पहले दिसंबर में ही रिलीज़ ‘अवतार – वे ऑफ वॉटर’ ने भी बढ़िया परफॉर्म किया और बॉक्‍स ऑफिस को चमकदार बनाया. इसके चलते कंपनी (पीवीआर आईनॉक्‍स) को दिसंबर तिमाही में 16.1 करोड़ रुपये का प्रॉफिट भी हुआ.

लेकिन फरवरी और मार्च में आईं हिंदी फिल्‍मों ने बॉक्‍स ऑफिस को फिर से निराशा के गहरे गर्त में ढकेल दिया. इस दौरान आई खिलाड़ी कुमार (अक्षय कुमार) की ‘सेल्‍फी’ ने दर्शकों को बहुत निराश किया. अजय देवगन की ‘भोला’ भी कमाई के मामले में पीछे ही रही. यह फिल्‍म चूंकि 30 मार्च को रिलीज़ हुई थी इसलिए इसने कमाई के मामले में अगली तिमाही को प्रभावित किया. यानि नए वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2023) का पहला सप्‍ताह ही इनकम के मामले में अच्छा साबित नहीं हुआ.

सवाल ये है कि घाटे का कारण क्‍या है और इसका इलाज क्‍या है? पहला मुख्‍य कारण तो कोरोना है. इस महामारी के चलते जो लॉकडाउन लगा, उसने सबसे ज्‍यादा कमर मनोरंजन उद्योग की ही तोड़ी. लॉकडाउन जब खुला तब भी सिनेमाघरों के ताले चाबी के इंतज़ार में मायूस लटके रहे. लंबे अरसे बाद जब सिनेमाघर दर्शकों के लिए खोले गए, तब भी दर्शकों ने थिएटर जाने में रूचि नहीं ली. कोविड चला गया था, लेकिन दहशत जो बाकी थी.

‘कोढ़ में खाज’ ये कि लॉकडाउन रूपी आपदा को अवसर में बदलने वाले खिलाड़ी भी मनोरंजन की दुनिया में मौजूद थे. इसे सबसे बेहतर और लाभदायक तरीके से ‘ओटीटी प्‍लेटफार्म्‍स’ ने भुनाया. उन्‍होंने दर्शकों को घर बैठे सस्‍ते में उम्‍दा प्रोग्राम्‍स और बेहतरीन फिल्‍में परोसीं. बॉलीवुड की मसाला फिल्‍मों पर सबसे ज्‍यादा प्रहार करते हुए उन्‍होंने चेताया कि बड़े सितारों के दिन अब लद गए हैं और मनोरंजन की दुनिया का नया बादशाह अब सिर्फ और सिर्फ ‘कंटेंट’ है.

‘ओटीटी’ के यूनिक कंटेंट वाले प्रोग्राम्‍स और फिल्‍मों ने सबसे ज्‍यादा बॉलीवुड को ही नुकसान पहुंचाया. अगर कमाई की पड़ताल करें तो पता चलता है कि साउथ की फिल्‍मों ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचकर कमाई में इज़ाफा किया है. हॉलीवुड ने भी इसमें महती भू‍मिका अदा की और दर्शकों को थिएटर आने के लिए ललचाया. लेकिन ये नाकाफी थे, क्‍योंकि जिस मात्रा में कमाई और रेवेन्‍यु की जरूरत इस इंडस्‍ट्री को है, उसके लिए देश भर में फैले हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड का चलना जरूरी है. साउथ और हॉलीवुड एक हद तक ही योगदान दे सकते है. भारतीय मनोरंजन उद्योग के सर्वाइवल-रिवाईवल के लिए बॉलीवुड फिल्‍मों का हिट होना जरूरी हैं, हिंदी फिल्‍मों का चलना बहुत जरूरी है.

मनोरंजन उद्योग को अगर मानव शरीर मानें तो बॉलीवुड को इसकी रीढ़ कहना होगा, यह मेरूदंड है. बेशक इसके पूरे घुरिए (हड्डियां -Vertebrae) अभी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, घिस गए हैं. लेकिन आइलिंग-ग्रिसिंग से ठीक हो सकते हैं. उम्‍मीद की जानी चाहिए कि ये जल्‍द ही ठीक होंगे और मनोरंजन की दुनिया को उसके पुराने मुकाम तक जरूर पहुंचाएंगे. नई ऊंचाइयां भी प्राप्‍त करेंगे. साथ ही पीवीआर आइनॉक्‍स जैसे मल्‍टीप्‍लेक्‍स ब्राण्‍ड्स को मजबूर करेंगे कि वो स्‍क्रीन्‍स बंद करने की अपनी योजना को कचरे के डिब्‍बे में डालें और आने वाले साल में नए स्‍क्रीन्‍स खोलने की घोषणा को न सिर्फ अमलीजामा पहनाएं, बल्कि उसमें भारी इज़ाफा भी करें, बढ़ोत्तरी करें.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Box Office Collection, Entertainment, Entertainment Special

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Author: Up Head Line

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