5 Guarantees: कर्नाटक का 5 गारंटी वाला हाइवे… क्या कांग्रेस को मिलेगी 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत!

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रिपोर्ट- संतोष चौबे

नई दिल्ली: राहुल गांधी का कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले और बाद में मतदाताओं के लिए जो अहम संदेश रहा, वह है पांच गारंटी. इनमें हर महीने हर घर में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवार के प्रत्येक सदस्य को 10 किलो मुफ्त चावल, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, परिवार की महिला मुखिया को 2,000 रुपये और स्नातकों, डिप्लोमाधारियों को बेरोजगारी भत्ता शामिल है.

भाजपा के दिए शब्द मुफ्त की रेवड़ियों का इस्तेमाल कांग्रेस ने बसवराज-बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ एक मजबूत कांटे के तौर पर किया जिसमें पूर्व सरकार पूरी तरह फंस कर रह गई.

घोषणा और फैसले तारीख दर तारीख
16 अप्रैल, 2023, राज्य में चुनावों की घोषणा के बाद अपनी पहली रैली में जनता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो कैबिनेट बैठक के पहले दिन से ही यह पांच गारंटी लागू की जाएंगी.

10 मई को चुनाव से दो दिन पहले भी राहुल ने फिर से ट्वीट किया कि, पांच गारंटी पर कार्य प्रगति पर- पहला दिन, पहली कैबिनेट बैठक.

13 मई को कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की, राहुल ने कर्नाटक के लोगों को पार्टी के अभियान, उसके वादों और दिए गए अवसर पर विश्वास करने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया. लेकिन इस प्रभावशाली जीत के बाद, अब पार्टी के लिए इन गारंटियों को लागू करने का कठिन समय आ गया है, खासकर जबकि अगले लोकसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है.

20 मई को सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने शपथ ली. कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री बने और आठ वरिष्ठ विधायकों को बिना विभागों के कैबिनेट मंत्री बनाया गया. सरकार बन जाने के बाद राहुल ने कहा कि अगले दो घंटे में पांच गारंटी को कानून में बदल दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम झूठा आश्वासन नहीं देते हैं, बल्कि हम अपनी बात के धनी हैं. नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक एक से दो घंटे में होगी. उस बैठक के साथ सभी पांच ‘गारंटी’ कानून का रूप लेंगी.’

थोड़ा और वक्त फिर गारंटी लागू करने की गारंटी
उस दिन सरकार बनने के बाद इन पांच गारंटियों को सैद्धांतिक मंजूरी तो दे दी गई लेकिन इन्हें कानून में नहीं बदला गया. मुख्यमंत्री ने इसके लिए अगली बैठक तक का वक्त मांगा, यह कहा गया कि पांच गारंटियों को लागू करने के लिए वित्तीय पहलू औऱ संचालन के तरीके पर चर्चा की जानी थी.

जब सिद्धारमैया से पूछा गया कि मतदाताओं से इन वादों की घोषणा करते समय इस सब पर विचार क्यों नहीं किया गया, तो उन्होंने इस पर आगे बढ़ने और उन्हें लागू करने के लिए अपनी सरकार की मंशा पर भरोसा रखने के लिए कहा. उनका कहना था कि 3 लाख करोड़ बजट वाले राज्य में हर साल 50,000 करोड़ रुपये खर्च के वादों की उम्मीद करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए

गांरटी लागू करने में अनुमानित लागत
राज्य के लिए उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से एक आकलन लगाया जाए तो पता चलता है कि इन पांच में से तीन गारंटी यानी मुफ्त बिजली, हर परिवार की महिला मुखिया को 2,000 रुपये, और स्नातकों और डिप्लोमा धारकों को बेरोजगारी भत्ता-की लागत 54,000 करोड़ बैठती है. अगर इसमें महिलाओं के लिए मुफ्त खाद्यान्न और बस की सवारी को भी जोड़ लिया जाए तो यह बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रुपये पहुंच जाएगा, हालांकि इन पांच गारंटियों की अंतिम लागत केवल तभी जानी जा सकती है जब वे पूरी तरह से लागू हो जाएंगी.

और लागू कर दी गई गारंटी
27 मई को, दो और मंत्रियों ने शपथ ली, इसके साथ मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को मिलाकर कुल मंत्रियों की संख्या 32 हो गई. विभागों की घोषणा 28 मई को की गई थी. 2 जून को जब दूसरी कैबिनेट बैठक हुई, तब सिद्धारमैया सरकार ने सभी पांच गारंटियों को मंजूरी दे दी. इसके बाद 1 जुलाई से गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवारों को मुफ्त बिजली और 10 किलो अनाज की योजना लागू हो जाएगी. परिवार की महिला मुखिया को 2,000 रुपये देने की गारंटी की शुरुआत 15 अगस्त से होगी. जिसके पात्र बीपीएल, एपीएल और अंत्योदय कार्ड धारक परिवारों के सदस्य होंगे. वहीं महिलाएं 11 जून से गैर-एसी बस में कर्नाटक के भीतर मुफ्त बस की सवारी का लाभ उठा सकती हैं

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3 जून को सरकार ने स्नातक व डिप्लोमा धारकों को बेरोजगारी भत्ता देने का आदेश जारी किया. 2023 में पास हुए और 6 महीने से बेरोजगार युवा इस योजना के पात्र होंगे. इसके तहत बेरोजगार स्नातक को दो साल के लिए हर महीने 3,000 रुपये जबकि एक बेरोजगार डिप्लोमा धारक को 1500 रुपये महीना दिए जाएंगे.

सिद्धारमैया सरकार ने इन गारंटियों की मंजूरी में 12 दिन लिए. इसमें पहली गारंटी सरकार बनने के 13 दिन बाद, दूसरी जून 11 को यानी 21 दिन बाद और तीसरी-चौथी 41 दिन में वहीं पांचवीं 86 दिन में लागू होगी. राज्य सरकार ने पांच में से 4 गारंटी को तुरंत लागू करने के पीछे की वजह भविष्य में होने वाले चुनाव को बताया .

कर्नाटक की सड़क क्या कांग्रेस को पहुंचाएगी चारों राज्य और केंद्र में
देश में इस साल ही 4 विधानसभा चुनाव, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, और तेलंगाना में होने हैं. कांग्रेस इन राज्यों में चुनाव की दौड़ में अहम खिलाड़ी है. राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तो उनकी ही सरकार है. विधानसभा चुनाव के निपटते ही अगले साल लोकसभा चुनाव भी कतार में लगे हैं. कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए गठबंधन बनाने की पुरजोर कोशिश में लगी है और पार्टी बार बार संकेत देती रही है कि उनके प्रधानमंत्री के उम्मीदवार राहुल गांधी होंगे.

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आने वाले चुनावों में राह आसान करने में कर्नाटक एक चिकने और सपाट हाइवे के तौर पर काम कर सकता है, अन्यथा इसके उलट जिस तरह कर्नाटक में सत्ता विरोधी लहर का कांग्रेस को फायदा मिला ठीक वैसा माहौल कांग्रेस शासित राज्यों में भी हो सकता है. और यह वह तथ्य है जो लोकसभा चुनाव में भी काम करेगा. 2014 के बाद से ही भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बहुत शानदार प्रदर्शन किया है, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से चले आ रहे राजनीतिक अंधविश्वास को तोड़ा और गुजरात, असम और उत्तराखंड में अपनी सरकारों के अस्तित्व को बरकरार रखा. कांग्रेस के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता सुशासन ही हो सकता है. भले ही मुफ्त में दी जाने वाली चीजों को लागू करने के जरिए से हो. जिससे लंबे वक्त में देश की वित्तीय सेहत को नुकसान पहुंचने की आशंका है.

Tags: Assembly Elections 2023, Congress, Congress leader Rahul Gandhi, Karnataka

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Author: Up Head Line

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