
कासिम ख़ान/नूंह.1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मेवातियों का भी नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. मेरठ में उठी चिंगारी का असर था कि हर मेव के मन में अंग्रेजों को भगाने की अलख जाग उठी थी. मेव समाज ने अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन चंद गद्दारों ने इसकी सूचना अंग्रेजों को पहुंचा दी, जिससे हजारों की संख्या में क्रांतिकारियों को शहादत देनी पड़ी. क्षेत्र में दस हजार से भी अधिक बहादुर शहीद हुए थे. इनमें से चंद शहीदों को छोड़ अन्य शहीदों का नाम पता भी पूर्ण रूप से दर्ज नहीं है. इस पहली जंग-ए-आजादी में मेवात के लोगों पर कितने जुल्म किए गए इसकी जानकारी गुड़गांव गजटियर से मिलती है.
ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ पहली बार एकजुटता के साथ आज़ादी की जंग का बिगुल 1857 में फूंका गया था. 1857 की क्रांति 10 मई को शुरू हुई थी और 11 मई को क्रांतिकारी दिल्ली आए थे. शाम को क्रांतिकारियों ने गुड़गांव पर हमला किया तो मेवाती उसमें शामिल हो गए. मेवात उस समय गुड़गांव का हिस्सा था और इसकी आबादी 1लाख 10 हजार थी. 30 प्रतिशत ज़मीनों पर मेवातियों का कब्ज़ा था.
10000 लोग हुए थे शहीद
मेवातियों ने उस समय 7 युद्ध लड़े. जिसमें नूंह, घासेड़ा, रायसीना, तावडू, खोरी इत्यादि शामिल है. इस आमने-सामने की लड़ाई में मेवात के 6000 लोग शहीद हुए थे. जिनको अलग से फांसी दी गई, उनका रिकॉर्ड अलग है. कुल मिलाकर तकरीबन 10,000 लोग इस लड़ाई में शहीद हुए थे. 1857 में मेवातियों की हिम्मत देखकर में ब्रिगेडियर जनरल सावंत ने लिखा कि मेवाती घुड़सवारों का डर उन्हें हर समय सताता है. हर मोर्चे पर मेवात के वीरों ने उन्हें कड़ी टक्कर दी है.
शहीदों की याद में शहीद पार्क का निर्माण
मेवात के शहीदों की याद में शहीद पार्क का निर्माण किया गया है. इस पार्क में शहीदों के सम्मान में न केवल 100 फुट ऊंचा तिरंगा लहरा रहा है, बल्कि उन शहीदों के गांवों और नामों का भी यहां वर्णन किया गया है. जिससे युवा पीढ़ी अपने इतिहास के बारे में जागरूक रह सके. इतिहासकार सिद्दीक अहमद मेव ने बताया कि फिरोजपुर नमक, शाहपुर नंगली, खोरी, नूह, अड़बर गांव के लोगों 1857 की क्रांति में हिस्सा लिया था . इसके अलावा मेवाती महीनों तक लड़ते रहे और इसी लड़ाई में अंग्रेज अधिकारी एक्शन मारे गए. मेवातियों ने उस समय अंग्रेजी फौज का पूरी तरह से सफाया कर दिया था.
आजादी की लड़ाई में मेवातियों का अहम योगदान
कुल मिलाकर मेवात ने हमेशा देश के ख़ातिर कुर्बानियां दी हैं. यहां का इतिहास इस तरह की अनगिनत वीर गाथाओं से भरा पड़ा है. लेकिन उसे इतिहास के पन्नों में वह जगह नहीं मिल सकी जिस का यह इलाका हकदार था. आज भी मेवात के वीर शहीदों की याद में न केवल रूपडाका गांव में एक आलीशान मीनार बनी हुई है, बल्कि भूतपूर्व राज्यपाल डॉ. एआर किदवई के समय में मेवात के बहुत से गांवों में शहीदों की याद में शहीद मीनारों का निर्माण कराया गया.इस जिले के इतिहास की गाथा सुनकर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.
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FIRST PUBLISHED : June 08, 2023, 14:44 IST








