हाइलाइट्स
महासागर पृथ्वी के 50 फीसद की ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं.
महासागरों पर इंसान और अन्य जीवन की निर्भरता समझना बहुत जरूरी है.
इसीलिए हमें महासागरों को बचाना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल करना ही होगा.
कम लोग जानते है कि मानव जनित प्रदूषण की भीषण तो वायुमंडल नहीं वास्तव में महासागर झेल रहा था और उससे होने वाले दुष्प्रभावों से पृथ्वी को बचा भी रहा था. वास्तव में महासागर और समुद्र पृथ्वी के फेफड़ों की तरह होते हैं और दुनिया भर के लोगों के लिए भोजन और पोषण के सबसे बड़ा स्रोत भी होते हैं. आप महासगरों से कितनी भी दूरी पर रहते हों, लेकिन मानव जीवन की महासागरों पर गहरी निर्भरता इससे कम नहीं होती है. 8 जून को हर साल सयुंक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस (World Ocean Day 2023) मना जाता है और इस साल “प्लैनेट ओशीन: टाइड्स आर चेंजिंग” यानि “महासागर ग्रह: लहरे बदल रही हैं.” थीम लेकर आया है.
महासागरों की विशालता
महासागरों के महत्व बहुत है, लेकिन यह भी सच है कि तकनीकी तौर पर इतनी तरक्की करने के बाद, हम आज भी महासागरों के बहुत अधिक हिस्से को नहीं जानते हैं. पृथ्वी की सतह का 70 फीसद हिस्सा महासागर घेरते हैं. पृथ्वी की आधी ऑक्सीजन का उत्पादन महासागर ही करते हैं. यह पृथ्वी की अधकांश जैवविविधता का घर है.
इंसान के लिए महासागार
यह एक तरह से हमारी जीवन के आधार भी है क्योंकि अधिकांश इंसान भोजन के लिए समुद्र पर ही निर्भर हैं. दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा लोगों के लिए यह प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है और साल 2030 तक महासागरों पर आधारित उद्योग 4 करोड़ लोगों को रोजगार दे चुके होंगे. इन तमाम फायदों के बाद भी महासागरों को आज मदद की जरूरत है.
खत्म हो रहा है महासागरों से बहुत कुछ
बावजूद इसके कि हम महासागरों का बहुत सारा हिस्सा नहीं देख सके हैं. फिर भी महासागरों की 90 फीसद मछलियों के साथ 50 फीसद कोरल रीफ, जो खुद जैवविविधता का अपने आप में एक भंडार होते हैं, खत्म हो चुके हैं. और इसकी एक ही वजह है और वह यही है कि हम महासागरों से ज्यादा ले रहे हैं और बदले में कुछ वापस नहीं दे रहे हैं.
महासागरों की जैवविविधता तक पूरी पहुंच ना होने पर भी इंसान ने उसे बहुत कुछ खत्म कर दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
महासागरों को प्राथमिकता
जरूरत महासागरों में एक तरह का नया संतुलन लाने की है जिससे इसका खजाना कभी कम नहीं हो और कमी के नुकसान झेलने की जगह उसकी जीवंतता लौट आए. इसी मकसद से इस बार की थीम महासागर ग्रह: लहरें बदल रह हैं इस साल की थीम रखी गई जिससे दुनिया के निर्णयकर्ता, स्थानीय नेतृत्व , वैज्ञानिक, निजी क्षेत्र के कार्यकारी, नागरिक समाज, युवा कार्यकर्ता सभी लोग महासागरों को प्राथमिकता दे सकें.
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हर व्यक्ति को याद दिलाना
विश्व महासागर दिवस हर व्यक्ति को यह याद दिलाता है कि उसके रोजमर्रा के जीवन में महासागारों का क्या महत्व है. वे हमारे ग्रह के फेफड़े हैं और भोजन और दवाओं के बहुत ही बड़े स्रोत हैं और जैवमंडल के बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इस दिन का मकसद लोगों को यह जानकारी देना है कि महासागरों का इंसानों के जीवन पर क्या असर होता है.

हर व्यक्ति के लिए महासागरों के महत्व और संवेदनशीलता को समझना जरूरी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
संयुक्त राष्ट्र का मकसद
संयुक्त राष्ट्र विश्व महासागर दिवस के जरिए दुनिया भर के नागरिकों में महासागरों के लिए एक आंदोलन पैदा करना चाहता है और संसार के महासागरों के संधारणीय प्रबंधन के लिए दुनिया के लोगों को गतिमान क एकजुट करना चाहता है. इस साल संयुक्त राष्ट्र 8 जून को इस दिवस का अपने मुख्यालय में वार्षिक आयोजन कर रहा है.
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महासागरों पर वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग का बहुत ज्यादा दबाव है. वैज्ञानिकों को डर अगर इस दबाव की वजह से महासागरों की प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ गया तो उसके नतीजे मानव जाति सह नहीं पाएगी और ना ही पृथ्वी उसके नतीजों से उबर पाएगी. महासागरों के लिए अब विशेष प्रयास करने बहुत जरूरी हो गया है जैसे कि हमें ग्रीन हाउस उत्सर्जन कम करने के लिए कर रहे हैं.
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Tags: Climate Change, Environment, Research, Science, United nations, World
FIRST PUBLISHED : June 08, 2023, 06:52 IST








