
कृष्ण कुमार/ नागौर.इतिहास हमारी पुरानी संस्कृति व ऐसे कई तथ्यों से रुबरु करवाता है. इतिहास के कारण ही हमें संस्कृति, राजतंत्र और कई चीजों के बारे में पता चलता है. नागौर का इतिहास भी सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है. लेकिन आज हम एक छोटे से गांव के इतिहास के पन्नों को बताने की कोशिश कर रहे है.
नागौर प्राचीन समय में जोधपुर रियासत के अंतर्गत आता था. नागौर का प्राचीन नाम अहिच्छत्रपुर, नागाणां व संतो की भूमि के नाम से भी जाना जाता था. आज नागौर के एक ऐसे गांव से रुबरु करवाने जा रहे हैं, जिसमें सीधा प्रभाव जोधपुर के राजा जसवंत सिंह द्वितीय की पासवान नन्हीं जान का प्रभाव इस गांव में देखने को मिलता था. यहां पर नन्ही जान के द्वारा कर वसूलने का कार्य देखा जाता था.
चलिए नागौर के गोलीगढ़ गांव जो वर्तमान समय में सोमणा गांव के नाम से जाना जाता है. लेकिन इस गांव को उस समय गोलीगढ़ के नाम से जाना जाता था. यह गांव उस वक्त का एक ऐसा गांव था जो सबसे ज्यादा जोधपुर दरबार को कर देता था. यह गांव नागौर के अंतर्गत नहीं आता था बल्कि खालसा घोषित करने के कारण इस गांव को जोधपुर दरबार के अंतर्गत आता था. पहले के समय में कुछ खालसा गांव होते थे, यह इसलिए रखे जाते थे ताकि यह किसी राजा या ठाकुर को जागीरी के रुप में दे सके.
नन्ही जान की वजह से चौधरी ने छोड़ा गांव
गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गोलीगढ़ के एक किसान के द्वारा जोधपुर दरबार को सबसे ज्यादा कर दिया जाता था, तो नन्ही जान को गुमानराम चौधरी के द्वारा बराबर कर देने पर भी नन्हीं जान अपनी मनमानी करने लगी.जिसके बाद यहां के चौधरी को गिरफ्तार कर लिया और नन्ही जान व गुमानराम चौधरी के पुत्रों के बीच जंग छिड़ गई. हालांकि अंत में जंसवतसिंह द्वितीय के द्वारा इस जंग को समाप्त किया गया. नन्ही जान का प्रभाव होने की वजह से गुमानराम ने यह गांव छोड़ दिया और पास ही गांव सोनली में जाकर रहने लगे. कहते है कि राजा को यह बात पसंद नहीं आई तो नन्हीं जान के प्रभाव को इस गांव से खत्म कर दिया और गुमानराम चौधरी को पुन: यहां पर सम्मानपूर्वक इस गांव में लाए. उल्लेखनीय है कि यह सब जानकारी गांव वालों की और से बताई गई है. इसकी न्यूज 18 पुष्टि नहीं करता है और यह इतिहास से जुड़ा हुआ मामला है.
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FIRST PUBLISHED : June 07, 2023, 16:46 IST








