
रजत भट्ट/गोरखपुर. नेपाल से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर आए दो भाइयों की कहानी, किसी फिल्मी स्टाइल से कम नहीं है. काठमांडू से जब यह दोनों भाई गोरखपुर पहुंचे थे तो इनके यहां रुकने-रहने का कोई ठिकाना नहीं था. दोनों किराये के कमरा की तलाश में जुट गये. जैसे-तैसे इन्होंने एक रूम लिया. पास में ज्यादा पैसे नहीं थे. इनका पहले से प्लान था कि वो शहर में मोमोज का स्टॉल लगाएंगे, और उसके सहारे जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाएंगे.
काठमांडू के रहने वाले अमर तामन लगभग चार साल पहले अपने देश से गोरखपुर पहुंचे थे. यहां उन्हें मोमोज का बिजनेस करना था. इसलिए वो अपने साथ भाई को भी ले आये. वहां परिवार की जिम्मेदारी और खुद का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था. इसलिए वो गोरखपुर में मोमोज स्टॉल लगाने चले आए. अमर बताते हैं मोमोज बनाना उनका परिवारिक काम है. ऐसे में उनके लिए इससे बेहतर ऑप्शन कुछ नहीं हो सकता था. उन्होंने अपने पारिवारिक कला को बिजनेस में शामिल किया और आज अच्छा पैसा कमा रहे हैं.
3 वेराइटी में उपलब्ध कराते हैं मोमोज
गोरखपुर नगर निगम के सामने अमर अपना मोमोज दुकान लगाते हैं. पिछले चार साल से वो यहां मोमोज बेच रहे हैं. वहीं, उनका भाई दूसरे स्टॉल को संभालता है. नेपाली भाइयों के दुकान पर तीन वेराइटी के मोमोज मिलते हैं. साथ ही, उनका रोल भी लोगों को खूब पसंद आता है. प्रतिदिन शाम के करीब पांच बजे इनकी दुकान लगती है और रात नौ बजे तक सब कुछ खत्म हो जाता है. इस दौरान, अमर लगभग 400 प्लेट मोमोज और 100 प्लेट रोल बेच देते हैं.








