
कुंदन कुमार/गया. बिहार के गया जिला में ब्लैक पोटैटो की सफल खेती के बाद बीज की काफी डिमांड है. इस बीच ब्लैक पोटैटो की सफलता के बाद ब्लैक हल्दी की खेती शुरू की जा रही है. दरअसल जिले के टिकारी प्रखंड क्षेत्र के गुलरियाचक गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान आशीष कुमार सिंह इस वर्ष डेढ एकड़ में ब्लैक हल्दी की खेती कर रहे हैं. बता दें कि आशीष कुमार सिंह खेती में प्रयोग के लिए विशेष पहचान रखते हैं. ब्लैक पोटैटो की सफल खेती कर पूरे राज्य में अपनी पहचान बना चुके हैं और अब ब्लैक हल्दी की खेती शुरू कर रहे हैं.
किसान आशीष ने वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश से ब्लैक हल्दी के बीज मंगवाए थे. पिछले 2 साल से यह गया में ब्लैक हल्दी की खेती कर रहे हैं. ब्लैक हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं. जिस कारण इसकी काफी डिमांड है. ब्लैक हल्दी का इस्तेमाल आमतौर पर औषधि बनाने के लिए किया जाता है. वर्ष 2016 में भारतीय कृषि विभाग ने काली हल्दी को लुप्त प्राय प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया है. ब्लैक हल्दी औषधीय गुणों के लिए पहचान रखती है. यह किसानों को आर्थिक समृद्धि देने में भी सक्षम है.
ऐसे मिली ब्लैक हल्दी के बारे में जानकारी
किसान आशीष कुमार सिंह ने न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत में बताया कि लेख पढ़ने के दौरान ब्लैक हल्दी के बारे में जानकारी इकट्ठा की थी.यह एक विलुप्त प्राय प्रजाति है, इसलिए इसे बढ़ाने के उद्देश्य से इसकी खेती पिछले 2 साल से कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश से ब्लैक हल्दी के बीज मंगवाए थे. जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय के लोग 3000 वर्ष पूर्व से ही इस हल्दी का प्रयोग कर रहे हैं और इसे शुभ माना जाता है. उन्होंने बताया कि एक हल्दी 100 ग्राम वजन तक का उपज हो रहा है. यह हल्दी किसी भी सीजन में उगाया जा सकता है.
ब्लैक हल्दी के हैं यह फायदे
गया कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर के कृषि वैज्ञानिक देवेंद्र मंडल ने बताया कि ब्लैक हल्दी में पीले हल्दी की तुलना में 20 गुना अधिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं. ब्लैक हल्दी को काटकर सूंघने पर कपूर जैसी खुशबू आती है, इसलिए इसका इस्तेमाल खाने के लिए नहीं किया जाता. ब्लैक हल्दी में औषधीय गुण पाए जाते हैं और इससे कई बीमारी ठीक की जा सकती हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 07, 2023, 14:21 IST








