गजब का किसान! रेत में उगा दिया सेब…वैज्ञानिक भी हैरान, अब उद्यान विभाग करेगा जांच

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

प्रदीप साहू/चरखी दादरी: कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं. चरखी दादरी के किसान धर्मेंद्र श्योराण ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. धर्मेंद्र ने रेतीले टिब्बों में सीजनल फसलों की पैदावार कर असंभव को संभव कर दिखाया है. इस किसान का दावा है कि उन्होंगे ऐसी ऑर्गेनिक दवा भी तैयार की है जो किसी भी फल न देने वाले पेड़ पर प्रयोग की जाए तो वह फल देना शुरू कर देता है.

इसी दवा के इस्तेमाल से ही उन्होंने रेतीले टिब्बों पर सेब की पैदावार करके दिखाई है. अब गांव कान्हड़ा के किसान धर्मेंद्र श्योराण किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं. किसान धर्मेंद्र ने रेतीली मिट्टी में सेब के साथ बादाम, अखरोट, काजू, अंजीर सहित चंदन के पेड़ भी उगा दिए हैं. बताया कि वह अपने स्तर पर नई तकनीक से खेती कर रहे हैं. उनकी मेहनत का परिणाम हैं कि हरियाणा में भी सेब, काजू, बादाम, केसर,अंजीर व पिस्ता की खेती हो रही है.

‘पीएम के सपने को किया साकार’
धर्मेंद्र द्वारा रेतीली मिट्टी में सेब पैदा करने और ऑर्गेनिक दवा तैयार करने की यह कामयाबी प्रदेश सरकार ही नहीं, पीएम ऑफिस तक पहुंच चुकी है. इन पौधों का पिछले साल पीएमओ कार्यालय की टीम ने निरीक्षण भी किया था. किसान द्वारा लगाए सेब के पेड़ों पर इस गर्मी के मौसम में भी दर्जनभर फल लगे हुए साफ देखे जा सकते हैं. किसान धर्मेंद्र श्योराण ने अपनी पांच साल की कड़ी मेहनत से डेढ़ एकड़ में सेब का बगीचा लगाया है. किसान का कहना है कि पीएम के सपने को साकार करते हुए कड़ी मेहनत से रेतीली ज़मीन पर सेब पैदा कर दिया है. बस हिमाचल जैसे सेब के साइज़ का इंतज़ार किया जा रहा है.

आपके शहर से (चरखी दादरी)

चरखी दादरी

चरखी दादरी

तीन साल तक ट्रायल लिया, 2019 में लगाया बाग
किसान धर्मेंद्र ने बताया कि वैज्ञानिक नहीं मान रहे थे कि रेतीली ज़मीन पर सेब पैदा होगा. फिर भी हिम्मत नहीं हारी और वर्ष 2016 से हिमाचल व कश्मीर से सेब के पौधे लाकर तीन साल तक ट्रायल लिया. आखिरकार घर पर बनाई ऑर्गेनिक दवा का प्रयोग करते हुए वर्ष 2019 में डेढ़ एकड़ में सेब का बाग लगाया और फल भी शुरू हो गए. अगले वर्ष से प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.

सेब के पौधों पर जाली लगाकर गर्मी से बचाव
किसान धर्मेंद्र के अनुसार सेब के कुछ पौधों पर स्पेशल जाली लगाकर गर्मी से बचाव किया गया है. कहा, अगर उद्यान विभाग या सरकार से सहायता मिले तो वह पूरे बाग में जाली लगाकर बेहतर क्वालिटी का सेब पैदा करके साबित कर सकते हैं कि रेतीली जमीन का सेब का स्वाद बेहतर होगा.

उद्यान विभाग की टीम करेगी जांच
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि किसान धर्मेंद्र द्वारा कौन सी प्रजाति के सेब के पौधे लगाए हैं, उसके लिए विभाग की टीम अगले सप्ताह मौके पर पहुंचकर जांच करेगी. क्योंकि कृषि विश्वविद्यालय ने भी माना है कि हरियाणा की जमीन व मौसम सेब की खेती करने लायक नहीं है. किसान ने अपने स्तर पर कैसे पैदा किया, उनकी टीम द्वारा जांच की जाएगी. बताया कि रेतीली जमीन पर जो सेब पैदा हुआ है, उसका स्वाद हिमाचल व जम्मू में पैदा होने वाला सेब जैसा नहीं होगा.

12वीं पास हैं धर्मेंद्र
किसान धर्मेंद्र श्योराण ने मात्र 12वीं तक की परीक्षा पास की है. वह मेहनत के बलबूते पर देश में कृषि व किसानों की हालत में सकारात्मक सुधार लाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं. धर्मेंद्र ने काजू, बादाम, केसर व अंजीर जैसे पेड़ भी घर पर लगा रखे हैं. बताया कि मेहनत के बल पर हर तरह की फसल, फल या फूल किसी भी क्षेत्र में पैदा की जा सकती है.

Tags: Agriculture, Apple, Charkhi dadri news, Haryana Farmers

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें