
नई दिल्ली. भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ ओलंपिक पदक विजेता पहलवानों ने मोर्चा खोल रखा है. बृजभूषण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज कराए गए हैं. पहले महिला पहलवानों ने पुलिस के समक्ष धारा 161 के तहत बयान दर्ज कराया और फिर धारा-164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराए गए हैं.
नाबालिग पहलवान ने अपने आरोप लिए वापस
बता दें कि इस बीच बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक नाबालिग रेसलर ने अपने आरोप वापस ले लिए हैं. इससे पूर्व नाबालिग ने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए अपने दोनों बयानों में बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. द इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग ने एक बार फिर सीआरपीसी 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष ताजा बयान दर्ज कराया है. आइए जानते हैं कि आखिर CRPC 161 और 164 के बीच क्या अंतर है, जबकि दोनों ही धाराओं में मामले से संबंधित बयान दर्ज किये जाते हैं…
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धारा 161 के तहत पुलिस दर्ज करती है चश्मदीद गवाहों के बयान
सीआरपीसी 1973 के सेक्शन 161 को आप इस तरह से समझ सकते हैं कि किसी भी मामले में पुलिस द्वारा की जाने वाली जांच है. सेक्शन 161 के तहत पुलिस केस के सभी गवाहों और सबूतों की जांच और उनका परीक्षण करती है. इस जांच के दौरान पुलिस मामले के गवाहों के बयान भी लेती है. धारा-161 के तहत पुलिस के समक्ष दिये गए बयान को शपथ नहीं माना जाता है और ना ही इस बयान के लिए आपको जिरह पर परखा जाता है. इस तरह के बयान को ठोस सबूत नहीं माना जाता है.
मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज होता है बयान
सीआरपीसी की धारा 164 के तहत इकबालिया बयान दर्ज किया जाता है. कोई मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट इन्हें दर्ज करा सकता है. बयान दर्ज कराने से पहले मजिस्ट्रेट बताते हैं कि व्यक्ति के लिए ऐसा इकबालिया बयान दर्ज कराना अनिवार्य नहीं है. यह पूरी तरह से उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह बयान दर्ज कराए या नहीं. 164 के तहत दर्ज बयान की अहमियत है. लेकिन इन्हें ठोस सबूत नहीं माना जाता है. सिर्फ पुष्टि के लिए इन्हें इस्तेमाल किया जाता है.
दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया है 2 FIR
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज किया हुआ है. इसमें महिला पहलवानों ने कई गंभीर आरोप लगाया है. यौन उत्पीड़न, गलत तरीके से छूना, पीछा करना, सेक्सुअल फेवर मांगने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. वहीं बीते समोवार को इस पूरे आंदोलन के मुख्य चेहरों में शामिल बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक अपनी रेलवे की जॉब पर लौट गईं.
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Tags: Brij Bhushan Sharan Singh
FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 09:45 IST








