Cyclone Biparjoy : अरब सागर में बन रहा नया बवंडर; कैसे पड़ा बिपरजॉय नाम, कितना होगा असर? जानें सारी अहम जानकारी

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नई दिल्ली. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 5 जून 2023 को दक्षिण पूर्व अरब सागर के ऊपर एक चक्रवात बना. इसके प्रभाव से अगले 24 घंटों के दौरान उसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. चक्रवात का नाम बिपरजॉय दिया गया है. आईएमडी ने कहा, ‘चक्रवात का मार्ग अभी स्पष्ट नहीं है. निजी मौसम पूर्वानुमानकर्ता स्काईमेट के अनुसार कुछ मॉडल देश के पश्चिमी तट के साथ उत्तरी दिशा में इसकी गति का संकेत दे रहे हैं. कुछ मॉडल शुरू में उत्तर की ओर इसकी गति और ओमेन और यमन की ओर उत्तर-पूर्व दिशा में पुन: वक्रता का संकेत देते हैं.

चक्रवात का नाम बांग्लादेश द्वारा दिया गया बिपरजॉय है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) को भ्रम से बचने के लिए एक नाम देते हैं. सामान्य तौर पर, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को क्षेत्रीय स्तर पर नियमों के अनुसार नामित किया जाता है. हिंद महासागर क्षेत्र के लिए, चक्रवातों के नामकरण के लिए एक सूत्र पर 2004 में सहमति हुई थी. इस क्षेत्र के आठ देशों – बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड – सभी ने नामों का एक सेट दिया, जिन्हें क्रमिक रूप से सौंपा जाता है जब भी चक्रवाती तूफान विकसित होता है.

इस तरह से होता है नामों का चयन
नामों को याद रखने और उच्चारण करने में आसान होने के लिए चुना जाता है और उन्हें अपमानजनक या विवादास्पद नहीं होना चाहिए. उन्हें विभिन्न भाषाओं से भी चुना जाता है ताकि विभिन्न क्षेत्रों के लोग उनके साथ पहचान सकें. नामकरण प्रणाली समय के साथ विकसित हुई है. अभ्यास के शुरुआती वर्षों में, नामों को वर्णानुक्रम में चुना गया था, जिसमें वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर को एक नाम सौंपा गया था. हालांकि, यह प्रणाली भ्रामक और याद रखने में मुश्किल पाई गई, इसलिए पूर्व-परिभाषित नामों की वर्तमान प्रणाली शुरू की गई थी.

केरल से महाराष्ट्र तक देश के पश्चिमी तट पर बारिश
चक्रवात की संभावना को लेकर मौसम विभाग ने कहा, ‘इसके उत्तर की ओर बढ़ने और अगले 48 घंटों के दौरान दक्षिण-पूर्व और उससे सटे पूर्व-मध्य अरब सागर में दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है. स्काईमेट ने एक बयान में कहा कि केरल से महाराष्ट्र तक देश के पश्चिमी तट पर बारिश की गतिविधियां निश्चित रूप से तेज होंगी. चक्रवात मानसून के प्रवाह को समय पर मुंबई पहुंचने में मदद करेगा.

कर्नाटक और महाराष्ट्र तट पर 8 से 10 जून के बीच समुद्र की स्थिति खराब रहेगी और 9 से 12 जून के बीच गुजरात तट पर कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी.

Tags: Cyclone, Imd, Weather Alert

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Author: Up Head Line

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