
मधुपर्णा दास
नई दिल्ली. ओडिशा के बालासोर जिले में 2 जून को हुई ट्रेन दुर्घटना ( Odisha train accident) के बाद, पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी (Dinesh Trivedi) ने सबसे पहले तोड़फोड़ करने की आशंका जाहिर की थी. News18 से चर्चा में उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना के पीछे तोड़फोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. दुर्घटना, प्रकृति में सबसे खराब माना जाता है. ओडिशा ट्रेन हादसा में बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी दुर्घटना में शामिल थी.
प्रारंभिक जांच और इंजीनियरों के निष्कर्षों के बाद मंत्रालय ने कल इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया है. पिछले 10 वर्षों में यह तीसरी बार है जब एक केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा एक ट्रेन दुर्घटना मामले की जांच की जाएगी. 2010 में, सीबीआई ने ज्ञानेश्वरी दुर्घटना की जांच की थी, छह साल बाद NIA ने कानपुर ट्रेन दुर्घटना की जांच की थी.
100% भरोसा है कि दुर्घटना, तोड़फोड़ के कारण हुई
News18 से बात करते हुए, पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि इंटरलॉकिंग सिस्टम, इसकी कार्यप्रणाली और घटना में क्या हुआ? इसके बारे में मेरे पास जो इनपुट और समझ है, मुझे लगता है कि एक गंभीर हेरफेर था, जिससे कोरोमंडल एक्सप्रेस मुख्य ट्रैक से लूप लाइन पर चली गई. अब और अधिक निष्कर्ष आने के साथ, मुझे 100% से अधिक यकीन है कि यह दुर्घटना तोड़फोड़ के कारण हुई थी, न कि केवल एक हादसे के कारण.’
इंटरलॉकिंग सिस्टम खराब हो जाए तो फेल सेफ प्रणाली लागू हो जाती है
दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि सिग्नल हरा था और इंटरलॉकिंग सिस्टम का इस तरह खराब होना असंभव है. एक रेलवे प्रणाली में, इतने संयोग नहीं होते हैं. यदि किसी बिंदु पर एक इंटरलॉकिंग प्रणाली विफल हो जाती है या खराब हो जाती है, तो एक और प्रणाली लागू होती है; इसे ‘फेल-सेफ’ कहा जाता है. यदि फेल-सेफ सक्रिय हो जाता है, तो विशिष्ट ट्रैक पर सभी सिग्नल लाल हो जाते हैं, और ट्रेन नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि यह कोई साजिश लगती है, जिसे सावधानी से अंजाम दिया गया है.
सिस्टम के अंदर से छेड़छाड़ किए जाने के बाद ट्रेन ने ट्रैक बदला
पूर्व रेल मंत्री ने कहा कि लोहे के अयस्क से लदी मालगाड़ी चट्टान की तरह खड़ी थी जिससे यात्री ट्रेन लूप लाइन पर जाकर उससे टकरा गई, यह सामान्य सिग्नल विफलता या पटरी से उतरने का मामला नहीं है. उन्होंने कहा कि ‘हमें यह समझना चाहिए कि एक लोको पायलट सिग्नल के आधार पर केवल ब्रेक दबा सकता है या ट्रेन की गति बढ़ा सकता है. लोको पायलट न तो ट्रैक बदल सकता है और न ही ट्रेनों का मार्ग बदल सकता है. लिहाजा, सिस्टम के अंदर से छेड़छाड़ किए जाने के बाद ट्रेन ने ट्रैक बदला और अपने आप ही मेन लाइन से लूप लाइन पर चली गई.
ट्रेन इतनी आसानी से ट्रैक कभी ट्रैक नहीं बदल सकती
अगर यह सिग्नल फेल होने या इंटरलॉकिंग सिस्टम की खराबी का एक साधारण मामला होता, तो ट्रेन इतनी आसानी से ट्रैक कभी नहीं बदल सकती थी. सिस्टम की विफलता के साथ, पटरियां स्वचालित रूप से अवरुद्ध हो जाती हैं और सिग्नल लाल हो जाते हैं. त्रिवेदी ने विपक्षी राजनेताओं द्वारा दिए गए सिद्धांतों को भी खारिज कर दिया, जिन्होंने रेलवे को “खराब व्यवस्था” कहा और टक्कर रोधी कवच तंत्र की अनुपलब्धता पर सवाल उठाया.
जनेश्वरी एक्सप्रेस दुर्घटना की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस तरह की घटना का अनुभव किया था. 2010 में पश्चिम मिदनापुर जिले में जनेश्वरी एक्सप्रेस दुर्घटना हुई थी. तब उन्होंने जांच सीबीआई को सौंप दी थी और सीपीआई (एम) से राजनीति नहीं करने को कहा था. हालांकि, अब वह भुलक्कड़ हो रही हैं और इसी तरह की बातें दोहरा रही हैं; जो सीपीआई (एम) ने तब किया था.’
.
Tags: Dinesh trivedi, Odisha Train Accident
FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 17:26 IST








