
विज्ञान ने हमारी ज़िंदगी में जितना बदलाव किया है, उतना हमने कभी सोचा भी नहीं था. इंसान की सामान्य चीज़ों से लेकर बच्चे के जन्म जैसी कॉम्प्लेक्स चीज़ में भी विज्ञान अहम भूमिका निभा रहा है. पहले बच्चों को सिर्फ कुदरती तौर पर पैदा किया जा सकता था लेकिन अब टेस्ट ट्यूब बेबी के ज़रिये बच्चे जन्म ले रहे हैं. इसी तरह से अब बच्चों के अंदर दो के बजाय तीन डीएनए भी हो सकते हैं. चौंकिए नहीं, ये सच है.
आमतौर पर बच्चों के पिता का पता करने के लिए उसका डीएनए टेस्ट किया जाता है लेकिन डॉक्टरों ने अब जिस तरह से बच्चों के जन्म का तरीका निकाला है, उसमें बच्चे के अंदर एक नहीं बल्कि तीन-तीन लोगों के डीएनए मौजूद होंगे. ब्रिटेन की फर्टिलिटी रेगुलेटरी ने पिछले महीने ही कंफर्म किया है कि ऐसे कुछ बच्चों का जन्म हुआ है, जिन्हें दो नहीं बल्कि तीन लोगों के डीएनए के साथ जन्म दिया गया है.
एक बच्चे में 3 लोगों का डीएनए
Human Fertilization and Embryology Authority के मुताबिक यूनाइटेड किंगडम में ऐसे 3-4 बच्चों का जन्म हुआ है, जिनमें तीन लोगों के डीएनए मौजूद हैं. हालांकि इनके माता-पिता का नाम उजागर नहीं किया गया है. इस तरह के बच्चे जेनेटिक बीमारियों से बच जाते हैं. तीन लोगों के डीएनए का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि मां में मौजूद डाइस्ट्रोफी, एपिलेप्सी, हार्ट प्रॉब्लम्स और बौद्धिक बीमारियां बच्चे में ट्रांसफर नहीं हो पाएं. इस थेरेपी को MRT कहा जाता है. इसके ज़रिये बच्चे माता-पिता की जेनेटिक बीमारियों से काफी कुछ सुरक्षित हो जाते हैं.
तो क्या होंगे तीन माता-पिता?
MRT के ज़रिये बहुत से परिवारों को अपनी अगली पीढ़ी सुरक्षित करने का मौका मिलेगा. ये एक AI के ज़रिये होने वाला ट्रीटमेंट है. ये किसी एक के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए वरदान की तरह है. अब मुद्दा ये है कि ऐसे बच्चों के माता-पिता क्या तीन लोग होंगे? इसका जवाब ये है कि बच्चे के माता-पिता सिर्फ एक कपल ही रहेगा, जबकि तीसरे शख्स को लेकर अलग-अलग देश अपना कानून बना सकते हैं. हालांकि अब तक तो यही माना जा रहा है कि एग या स्पर्म डोनर्स की तरह माइटोकॉन्ड्रियल डोनर्स का भी बच्चे पर कोई कानूनी हक नहीं होगा.
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FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 09:31 IST








