
हाइलाइट्स
टैक्स चोरी को रोकने के लिए स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन मांगा जाता है.
इसमें इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स की आय और खर्चों का मिलान करता है.
भिन्नता पाए जाने पर आयकर विभाग नोटिस देकर जानकारी भी मांगता है.
Income Tax: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय अगर आप अपनी आय की सही जानकारी नहीं दे रहे हैं तो आपके लिए मुसीबत हो सकती है. आयकर विभाग कर चोरी रोकने के लिए अपनी प्रणाली को लगातार दुरुस्त कर रहा है. उसके लिए स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (SFT) के जरिए यह पता लगाना बेहद आसान है कि आपकी कमाई और खर्च के ब्योरे में कहां बड़ा अंतर आ रहा है. किसी भी संदेह की सूरत में विभाग आपको नोटिस थमा देगा.
अगर आपको बैंक एफडी या बचत योजना से बड़ा ब्याज मिलता है, आप बैंक से बड़ा नकदी लेनदेन करते हैं, क्रेडिट कार्ड से भारी-भरकम शॉपिंग समेत शेयर और म्यूचुअल फंड से मिलने वाले मुनाफे पर आयकर विभाग की नजर रहेगी. खास बात है कि आप भले ही ये जानकारी इनकम टैक्स विभाग को नहीं दें लेकिन आईटी डिपार्टमेंट को इसकी भनक लग जाएगी, आइये जानते हैं कैसे?
क्या है SFT
टैक्स चोरी को रोकने के मकसद से स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन जैसी व्यवस्था को लागू किया गया है. निवेश एवं कर सलाहकार बलवंत जैन के अनुसार, इसके जरिए इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स की आय और खर्चों का मिलान करता है. इस दौरान किसी भी तरह का अंतर पाए जाने पर विभाग इसे तुरंत पकड़ लेता है.
इस व्यवस्था के जरिए इनकम टैक्स विभाग यह जानकारी जुटाता है कि कोई करदाता किसी तरह की जानकारी छिपा तो नहीं रहा. इसलिए इनकम ही नहीं बल्कि खर्चों पर भी आयकर विभाग की नजर रख रहा है. ऐसे में अगर कम कमाई और ज्यादा खर्च दिखा तो आईटी डिपार्टमेंट तुरंत नोटिस थमाता है. अगर टैक्सपेयर्स अपने खर्चों को लेकर सही जवाब नहीं देता है तो इसे गैर घोषित आय मानकर पेनाल्टी और इंट्रेस्ट के साथ टैक्स भरना पड़ता है.
SFT के दायरे में आएंगे ये ट्रांजेक्शन
- बैंक के बचत खाते में 10 लाख से ज्यादा नकद या जमा, चालू खाते से 50 लाख से ज्यादा की निकासी या डिपॉजिट
- 10 लाख से ज्यादा की बैंक एफडी और क्रेडिट कार्ड से 1 लाख से ज्यादा का पेमेंट
- 10 लाख से ज्यादा म्यूचुअल फंड में निवेश, बॉन्ड, शेयर्स या डिबेंचर्स ट्रांजेक्शन
- क्रेडिट या करेंसी कार्ड से 10 लाख से ज्यादा विदेशी मुद्रा के लेनदेन पर
आयकर विभाग को कैसे चलेगा पता
खास बात है कि एसएफटी के तहत इन सभी हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की डिटेल बैंक समेत वित्तीय संस्थान फॉर्म 61A में देते हैं, जिसमें बीते फाइनेंशियल ईयर का लेखा-जोखा होता है.
बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड हाउस, बॉन्ड और शेयर जारी करने वाली कंपनियां , प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रार और फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स को हर साल एसएफटी दाखिल करना होता है. अगर कोई संस्थान समय पर SFT जमा नहीं करते तो रोजाना के हिसाब से पेनाल्टी और जुर्माना देना होता है.
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Tags: CBDT, Income tax department, Income Tax Planning, Income tax return
FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 17:15 IST








