
वसीम अहमद/अलीगढ़. अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो आपके लिए कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होगी. बस जरूरत होती है तो लगन मेहनत और कठिन परिश्रम की ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है, अलीगढ़ की जमरीन खान के साथ जो खुद अपाहिज ( हैंडीकैप) होते हुए भी दूसरे लोगों की मदद करती है. जमरीन खान अनाथ बच्चे और कुछ बेसहारा लड़कियों को फ्री एजुकेशन देती हैं साथ ही उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का हुनर सिखाती हैं.
दरअसल, अलीगढ़ के सिविल लाइन इलाके मंजूर गढ़ी में रहने वाली जमरीन खान एक दिव्यांग महिला हैऔर पेशे से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात हैं. पारिवारिक कलह के चलते परिवार से अलग होकर अकेले रहती हैं.
पति भी इनको तलाक दे चुके हैं. जिसके बाद उन्होंने ठाना कि यह अब दूसरे बेसहारा लोगों की मदद करेंगी. 2017 से अब तक जमरीन खान बेसहारा लोगों की मदद करती हैं, अनाथ बच्चों को पढ़ाती है और लड़कियों को सिलाई कढ़ाई सिखा कर उन्हें हुनरमंद बनाने में मदद करती हैं.
बेसहारा लड़कियों को देती हैं फ्री एजुकेशन
जमरीन खान बताती हैं कि मैं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जॉब करती हूं. साथ ही मैं गरीब बच्चों को पढ़ाती हूं और उन्हें सिलाई कढ़ाई सिखाती हूं ताकि वह लड़कियां अपने पैरों पर खड़े हो सके और किसी की मोहताज न रहे और आगे उन्हें रोजगार मिल सके. इस प्रकार से मैं उन्हें गाइड करती हूं. करीब 100 से ज्यादा ऐसे बच्चे हैं जिनको मैं फ्री एजुकेशन देती हूं.
दरअसल, जब मेरी शादी हुई थी शादी के बाद मेरा डायवोर्स हो गया. इसके बाद मैं डिप्रेशन में चली गई थी. जब मैं डिप्रेशन से उभरी तब मुझे रिलाइज हुआ कि मुझे अब दूसरे लोगों के लिए खड़ा होना चाहिए. बेसहारा और अकेले लोग क्या होते हैं मुझे इसका एहसास हुआ और तब से ही मैं लोगों की मदद करती हूं. खासकर छोटे बच्चे और लड़कियां जो बेसहारा हैं उनकी मदद करती हूं.
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FIRST PUBLISHED : June 04, 2023, 17:18 IST








