
निशा राठौड़/ उदयपुर. उदयपुर शहर के आशाधाम आश्रम में रह रही और पिछले चार साल से अपने घर से बिछड़ी शांति बंजारा को जब अपना परिवार मिला तो शांति के खुशी का कोई ठिकाना नही रहा. वहीं अपनी मां को जिंदा देख बेटे की आंखे खुशी से छलक उठी. शांति भी अपने बेटे को देख रोने लगी. एक तरफ परिवार से मिलने की खुशी थी तो आश्रम से जाने का दुख भी शांति को सता रहा था.
चार वर्ष पूर्व मानसिक हालत गंभीर होने पर आई थी आश्रम
आशाधाम आश्रम की संचालिका सिस्टर डेमियन ने बताया की 26 सितंबर 2019 को भोपालपुरा पुलिस द्वारा आश्रम में भर्ती करवाया गया. भर्ती के दौरान इसकी मानसिक स्थिति सही नहीं थी. यह हमेशा घर जाने की जिद करती थी और समय पर खाना नही खाती थी. फिर धीरे-धीरे आश्रम में उसे समझाया गया और इसका इलाज करवाया फिर यह शांत रहकर खाना खाने लगी और लोगों से बातचीत करने लगी.
कपड़ो की रस्सी बनाने का काम करती थी शांता बाई
आश्रम में सबसे बुजुर्ग होने के वजह से उन्हें सब शांता बाई कह कर ही पुकारा करते थे. यहां रहते हुए शांता बाई ने कपड़ों की रस्सी बनाना और कुछ छोटे बड़े कार्य करना चालू कर दिया.धीरे-धीरे अपना मन लगाने लगी उम्र में अधिक होने के कारण यह सभी लोगों से अच्छा व्यवहार रखती थी. कुछ समय बाद अपने गांव की बातें करती. धीरे-धीरे उनसे उनके गांव का पता पूछ कर अभी हाल ही में अकोला सरपंच से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि यह महिला इसी ग्राम पंचायत क्षेत्र की है. सरपंच तारा मालावत ने उसके गांव सुरता खेड़ा में उसके पुत्र को सूचना दी जिससे उसके परिवार में खुशी का माहौल हो गया.
.
FIRST PUBLISHED : June 04, 2023, 13:04 IST








