Coromandel Express Accident: ओडिशा रेल हादसे से सेफ्टी पर सवाल, हाई-स्पीड ट्रेनों पर जोर, क्या सुरक्षा प्रंबधों पर फोकस कम?

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नई दिल्ली. ओडिशा में तीन ट्रेनों की टक्कर में 288 से अधिक लोगों की मौत हो गई. इसने रेलवे की सुरक्षा तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्योंकि मौजूदा वक्त में रेलवे चमचमाती नई ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों के साथ 2.4 ट्रिलियन रुपये के निवेश से एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. इस बड़ी खबर जुड़े टॉप 10 अपडेट इस तरह हैं:

  • बालासोर में शुक्रवार को हुआ रेल हादसा पिछले 20 साल से अधिक समय में देश की सबसे घातक रेल दुर्घटनाओं में से एक है. ये भीषण हादसा रेलवे के कायाकल्प की योजना के लिए एक झटके के रूप में सामने आई है. विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ साल में रेलवे के सुरक्षा रिकॉर्ड में सुधार हुआ है. इसके बावजूद इस दिशा में अभी और ज्यादा काम करना बाकी है.
  • रेलवे एक्सपर्ट का कहना है कि पैसेंजरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रेलवे अधिक से अधिक ट्रेनों की शुरुआत कर रहा है. लेकिन उनके सुचारू ढंग से संचालन के लिए कर्मचारियों को पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित नहीं किया गया है या उनका काम का बोझ बहुत ज्याद है.
  • रेलवे के पूर्वी तट ट्रैक पर जहां तीन ट्रेनों की टक्कर हुई, वह देश के सबसे पुराने और व्यस्ततम रेलमार्गों में से एक है, क्योंकि यहां से भारत का अधिकांश कोयला, तेल और दूसरा माल भी ढोया जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि ये ट्रैक बहुत पुराने हैं. उन पर लोड बहुत ज्यादा है. अगर रखरखाव अच्छा नहीं है, तो दुर्घटनाएं होंगी.
  • एक ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट का कहना है रेलवे पूरे नेटवर्क में टक्कर रोधी उपकरण और आपातकालीन चेतावनी प्रणाली जैसे सुरक्षा तंत्र को लगाने के काम में बहुत धीमी रफ्तार से काम कर रहा है. रेलवे हमेशा कहता है कि दुर्घटनाएं की संख्या बहुत कम स्तर पर हैं, क्योंकि वे उनके प्रतिशत के बारे में बात करते हैं. शुक्रवार की दुर्घटना जिस रेल मार्ग पर हुई, उस पर टक्कर रोधी प्रणाली कवच नहीं था.
  • भारतीय रेलवे का कहना है कि सुरक्षा हमेशा एक प्रमुख फोकस रहा है. पिछले कुछ वर्षों में इसकी कम दुर्घटना दर की ओर इशारा करते हुए रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा पर सवाल उठ रहा है क्योंकि अब एक घटना हुई है. लेकिन अगर आप आंकड़े देखेंगे, तो पाएंगे कि पिछले कई साल में कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है.
  • रेल मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि सुरक्षा का एक पैमाना प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर दुर्घटनाओं की संख्या, वित्त वर्ष 2013-14 में 0.03 से घटकर 2021-22 में 0.10 हो गया था.
  • बढ़ती इकोनॉमी में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोर देने के कारण भारतीयों के लिए लंबे समय से जीवन रेखा मानी जाने वाली 170 साल पुरानी रेल प्रणाली में तेजी से विस्तार और आधुनिकीकरण देखा गया है.
  • रेलवे के अनुसार 2017-18 में बनाए गए 1 ट्रिलियन रुपये के पांच-वर्षीय सुरक्षा कोष को 2022-23 से पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है. पहली योजना के तहत सुरक्षा संकेतकों में समग्र सुधार के बाद 450 अरब रुपये की अतिरिक्त धनराशि इसके लिए दी गई है.
  • भारतीय रेलवे दुनिया में चौथा सबसे बड़ा ट्रेन नेटवर्क चलाता है. यह हर दिन 1.3 करोड़ लोगों को यात्रा कराता है और 2022 में लगभग 1.5 अरब टन माल ढुलाई की है. इस साल सरकार ने रेलवे के लिए 2.4 ट्रिलियन रुपये का पूंजी परिव्यय दर्ज किया. जो इसे अपग्रेड करने के लिए ट्रैक बनाने, भीड़भाड़ को कम करने और नई ट्रेनें चलाने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 50 फीसदी अधिक है.
  • ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार की ट्रेन दुर्घटना भारत की तीसरी सबसे भीषण और 1995 के बाद से सबसे घातक दुर्घटना है. जब आगरा के पास फिरोजाबाद में दो एक्सप्रेस ट्रेनों की टक्कर हुई थी, जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए थे.

Tags: Indian railway, Odisha, Odisha Train Accident, Railways news

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Author: Up Head Line

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