
शक्ति सिंह/ कोटा. कोटा में गरीबी और हजार मुश्किलें झेल कर भी मेहनत के दम पर यहां गरीब के बच्चे भी अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं. मेहनत वो चाबी है, जो अमीर-गरीब सबकी किस्मत का ताला खोल देती है. ये कहानी है कोटा की बेटी गोरा की जिसने हजार चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता की वो कहानी लिखी जो सबके लिए प्रेरणादायक है. गोरा कुमारी शर्मा ने हिम्मत के साथ मेहनत कर आरबीएसई बोर्ड में 89.67 प्रतिशत हासिल किए.
कोटा की रामपुरा इलाके में टीन-शेड के मकान में रहने वाली गोरा कुमारी शर्मा जिसने कठिन परिश्रम और चुनौतियों के बीच 10th के परिणामों में सफलता हासिल की. गोरा के पिता का कोरोना काल में आमदनी स्त्रोत खत्म होने से पिता सदमे में आ गए. जिसके बाद माता मंजू देवी द्वारा एक दुकान खोल कर घर एवं पढ़ाई का खर्च चलाया जाता था. इस के चलते गोरा कुमारी का दाखिला प्राइवेट स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में करवाया गया. लेकिन गोरा के परिवार के ऊपर अभी और मुश्किल आना बाकी थी ऐसे में पिछले महीने एक दिन दुकान से घर आते समय गोरा की मां का सड़क हादसे में निधन हो गया और सभी जिम्मेदारियां इन चारों भाई बहनों के ऊपर आ पड़ी. गौरा इसके बाद भी हताश नहीं हुई और हिम्मत के साथ मेहनत कर आरबीएसई बोर्ड में 89.67 प्रतिशत हासिल किए
गोरा ने बताया कि परिवार आर्थिक स्थितियों से जूझ रहा था लेकिन शिक्षा ही सफलता की कुंजी थी. ऐसे में गोरा ने 7 से 8 घंटे पढ़ाई करने का लक्ष्य रखा हुआ था गौरा आगे डॉक्टर बनना चाहती है. गोरा कुमारी शर्मा चार बहन-भाइयों में सबसे छोटी है.








