
Success Story: कहते हैं ना कि अगर इंसान में प्रतिभा होती है, तो उसे मौके मिल ही जाते हैं. ऐसे ही एक शख़्स की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसने अभावों में भी मौका तलाश लिया और आज सफलता की इबारत लिख दी है. आप सबने क्विक हील कंपनी का नाम तो जरूर सुना होगा और इनके एंटीवायरस भी इस्तेमाल किए होंगे. जोकि काफी लोकप्रिय भी हैं. लेकिन क्या आप इस कंपनी के फाउंडर कैलाश काटकर की कहानी जानते हैं, कि कैसे उन्होंने एक रेडियो बनाने वाली दुकान से लेकर करोड़ों की कंपनी के मालिक होने तक का सफर तय किया है.
कैलाश काटकर का जन्म महाराष्ट्र के रहिमतपुर में 1966 में हुआ था. वे पुणे में पले बढ़े हैं और यहीं से उनकी स्कूली पढ़ाई लिखाई हुई है. कैलाश ने 10वीं के बाद स्कूल छोड़ दिया था और अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए छोटी उम्र में ही कैलकुलेटर और रेडियो रिपेयरिंग करने वाली दुकान में काम करना शुरू कर दिया था.
शुरू की खुद की दुकान
इसके बाद कैलाश ने खुद की रेडियो और कैलकुलेटर रिपेयरिंग की दुकान खोल ली. उस समय देश में सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री भी काफी तेजी से बढ़ रही थी और कैलाश इसे भांप गए थे. इसलिए उन्होंने कंप्यूटर खरीदने का निश्चय किया और कंप्यूटर के शॉर्ट टर्म कोर्स लेना शुरू कर दिए. तीन साल बाद उन्होंने CAT कंप्यूटर सर्विसेज की शुरूआत की, जो कंप्यूटर के रिपेयर और मेंटेनेंस का काम करती थी.
एंटीवायरस प्रोग्राम बनाने का आईडिया
उस समय रिपेयरिंग के लिए जो कम्प्यूटर आते थे, उनमें वायरस की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती थी. इसी वजह से डॉक्टर काटकर और उनके भाई को एंटीवायरस प्रोग्राम बनाने का आईडिया आया. दोनों भाइयों ने मिलकर पहले DOS एंटी वायरस का पहला वर्जन बनाया. इसके बाद कैलाश काटकर ने ‘क्विक हील’ कंपनी लॉन्च की, जो विंडोज वर्जन के कम्प्यूटर और नेटवर्क को सिक्योर करती थी. आज यह एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के लिए सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और यह माइक्रोसॉफ्ट की सर्टिफाइड पार्टनर भी बन गई थी. कभी 10वीं के बाद स्कूल से ड्रॉप आउट होने वाले कैलाश काटकर को चितकारा यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की डिग्री भी दी गई है. शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान मिला है.
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Tags: Education, Success Story
FIRST PUBLISHED : June 02, 2023, 17:27 IST








