क्‍या होती है हाइड्रोफोबिया बीमारी, कैसे इससे ग्रसित व्‍यक्ति बन जाता है नरभक्षी

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Cannibal: आपने शायद वो हॉलीवुड मूवीज देखी होंगी, जिनमें जॉम्‍बीज को सामान्‍य इंसानों पर हमला करते और उनका मांस खाते व खून पीते हुए दिखाया गया है. कुछ समय पहले ‘गो गोवा गोन’ नाम की बॉलीवुड फिल्‍म में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया था. हॉलीवुड और बॉलीवुड मूवीज के अलावा कई उपन्‍यासों, किताबों और मैग्‍जींस में भी नरभक्षी इंसानों की कहानियां लिखी गई हैं. हालांकि, ये सभी लेखकों की कल्‍पनाओं पर आधारित थीं. लेकिन, हाल में राजस्‍थान के पाली में 24 साल का एक नरभक्षी इंसान पकड़ा गया. उसने पहले एक महिला की हत्‍या की और फिर उसका मांस खाया. आखिर कैसे कोई इंसान इतना क्रूर कैसे हो गया?

स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक, राजस्‍थान में पकड़े गए नरभक्षी इंसान को एक गंभीर बीमारी है. उसका इलाज करने वाले डॉक्‍टर का कहना है कि उसे कभी किसी पागल कुत्‍ते ने काटा होगा. उस समय उसका अच्‍छे से इलाज नहीं किया गया होगा. हो सकता है कि उसे वैक्‍सीन ना लगाई गई हों. वह रेबीज के आखिरी दौर के संक्रमण से गुजर रहा है. इसी कारण उसकी हालत नरभक्षियों जैसी हो गई है. डॉक्‍टर के मुताबिक, पकड़े गए व्‍यक्ति को हाइड्रोफोबिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित है.

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क्‍या है हाइड्रोफोबिया बीमारी?
हाइड्रोफोबिया बीमारी से ग्रसित व्‍यक्ति नरभक्षी जैसा व्‍यवहार करने लगता है. अब समझते हैं कि ये बीमारी कैसे होती है और ये है क्‍या? हाइड्रोफोबिया बीमारी कुत्ते या वुल्‍फ फैमली के जानवरों के काटने या नाखून मारने से होती है. पालतू कुत्तों के काटने से हाइड्रोफोबिया बीमारी नहीं होती है. हाइड्रोफोबिया बीमारी आवारा और कच्चा मांस खाने वाले कुत्तों के काटने या नाखून मारने से हो सकती है. डॉक्‍टरों का कहना है कि पागल कुत्ते के काटने पर इस बीमारी के भयंकर होने की आशंका बहुत ज्‍यादा होती है.

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हाइड्रोफोबिया बीमारी से ग्रसित व्‍यक्ति नरभक्षी जैसा व्‍यवहार करने लगता है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

क्‍यों खाता है इंसान का मांस?
स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक, पागल कुत्ते के काटने पर रेबीज होती है. सही इलाज नहीं मिलने पर इंसान नरभक्षी हो सकता है. इसके बाद नरभक्षी में तब्‍दील हुए इंसान का दिमाग सही तरीके से काम करना बंद कर देता है. यही नहीं, ऐसे इंसान में दूसरे व्‍यक्ति को इंसान समझने की क्षमता खत्म हो जाती है. ऐसे में वह दूसरे इंसानों पर हमला कर देता है ओर मारने के बाद उनका मांस खा सकता है और खून पी सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पागल कुत्तों ही नहीं चमगादड़ या लोमड़ी के काटने से भी हाइड्रोफोबिया बीमारी हो सकती है.

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क्‍या हैं इस बीमारी के लक्षण?
आवारा, मांस खाने वाले या पागल कुत्‍तों के काटने पर इंसान के अंदर पहुचा रेबीज वायरस एक से तीन महीने तक निष्क्रिय रहता है. इसके बाद उसके लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं. रेबीज वायरस सक्रिय होने के बाद इंसान आक्रामक और चिड़चिड़ा होने लगता है. ये परेशानियां धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं. उसके सोचने-समझने की क्षमता घटने-बढ़ने लगते हैं. हालात गंभीर होने पर उसके मुंह से झाग निकलने लगते हैं. अगर किसी में इस तरह के लक्षण नजर आने लगें तो तत्‍काल उसका इलाज कराया जाना चाहिए.

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जीवनभर रह सकती है बीमारी
हाइड्रोफोबिया बीमारी से ग्रसित व्‍यक्ति के गले में जबरदस्‍त ऐंठन होने लगती है. नतीजतन बीमार व्‍यक्ति को खाना ही नहीं पानी तक निगलने में दिक्‍कत और दर्द होने लगता है. डॉक्टरों के मुताबिक, हाइड्रोफोबिया बीमारी जीवनभर साथ रह सकती है. इलाज और देखभाल से मरीज को काबू में रखा जा सकता है. हालांकि, इलाज नहीं मिलने पर वह नरभक्षी हो सकता है. पाली में पकड़ा गया सुरेंद्र मुंबई के पवई का कहने वाला है. वह काफी हिंसक है. उसने पुलिस पर हमला किया और 10 से ज्‍यादा लोगों को भी काटा है. इसके बाद सभी लोगों को वैक्‍सीन लगाई गई है.

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हाइड्रोफोबिया बीमारी से ग्रसित व्‍यक्ति के गले में जबरदस्‍त ऐंठन होने लगती है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

पानी, रोशनी से लगता है डर
डॉक्टरों के मुताबिक, जब सुरेंद्र की जांच की गई तो पता चला कि उसे पानी से डर लगता है. दरअसल, जब सुरेंद्र को पानी की बोतल दिखाई गई तो वह इतना डर गया कि जोर-जोर से चिल्लाने लगा. यही नहीं, जब टॉर्च की रोशनी मारकर उसकी आंखों की जांच की जा रही थी तो वह बुरी तरह से खूंखार बर्ताव करने लगा. उसकी जांच के लिए डॉक्‍टरों को उसे बेड से बांधना तक पड़ा. फिलहाल उसे काबू में रखने और बीमारी से उबारने के लिए डॉक्टरों ने सुरेंद्र को एंटी रैबीज के छह इंजेक्शन लगाए हैं.

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Author: Up Head Line

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